भारत के जासूस हो!' बांग्लादेश में एक और भारतीय नागरिक पर गिरा गाज

भारत के जासूस हो!' बांग्लादेश में एक और भारतीय नागरिक पर गिरा गाज

भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक रिश्ते इन दिनों सबसे नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, और इसी बीच एक बेहद चौंकाने वाली और तनाव बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन ने एक भारतीय नागरिक को हिरासत में लेने के बाद उस पर 'भारतीय जासूस' होने का गंभीर और मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिया है। बिना किसी ठोस और पुख्ता सबूत के उस नागरिक को स्थानीय अदालत में पेश कर सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है, और जानकारों का मानना है कि इस तरह की एकतरफा और शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां दोनों देशों के बीच पहले से ही बिगड़े हुए द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से गर्त में धकेल सकती हैं।

बांग्लादेश में बढ़ता भारत विरोधी माहौल और नागरिकों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा

जब से बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है और अंतरिम सरकार की कमान संभाली गई है, तब से देश के भीतर भारत विरोधी बयानों और प्रॉपेगैंडा को खुला संरक्षण मिलता दिख रहा है। आम नागरिकों, मीडिया और वहां की कट्टरपंथी ताकतों द्वारा लगातार ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जिससे वहां रह रहे या यात्रा कर रहे भारतीयों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा सके। ताजा मामले में जिस भारतीय नागरिक को दबोचा गया है, उसके परिजनों और शुभचिंतकों का कहना है कि वह पूरी तरह से निर्दोष है और किसी वैध या सामान्य सिलसिले से वहां मौजूद था। लेकिन स्थानीय सुरक्षा अमले ने राजनीतिक दबाव और सनसनी फैलाने के इरादे से उसे फौरन जासूस करार देते हुए जेल की हवा खिला दी, जो मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है।

भारतीय उच्चायोग की त्वरित सक्रियता और कूटनीतिक स्तर पर तेज होती हलचल

इस पूरे घटनाक्रम के प्रकाश में आते ही ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने अत्यंत तत्परता और संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मामले का कड़ा संज्ञान लिया है। भारतीय राजनयिक और कंसुलर टीम लगातार बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन के संपर्क में बनी हुई है ताकि गिरफ्तार किए गए भारतीय नागरिक की कुशलक्षेम जानी जा सके और उसे फौरन कानूनी सहायता मुहैया कराई जा सके। भारत सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि अपने नागरिकों के हितों, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बांग्लादेश सरकार इस तरह के ड्रामेबाजी और हरकतों को नहीं रोकती है, तो भारत की ओर से बहुत कड़ा और निर्णायक रुख अपनाया जा सकता है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक और राजनीतिक संबंध और अधिक प्रभावित होंगे।

मीडिया का एक वर्ग और खुफिया एजेंसियों द्वारा फैलाया जा रहा सुनियोजित भ्रम जाल

बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ समय से यह सुनियोजित एजेंडा चलाया जा रहा है कि देश के अंदर होने वाली हर छोटी-बड़ी राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता के पीछे भारत की खुफिया एजेंसियों का हाथ है। इसी प्रोपेगेंडा के तहत अब आम भारतीय नागरिकों को भी चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि जनता का ध्यान देश की वास्तविक आंतरिक विफलताओं, महंगाई और चरमराती कानून व्यवस्था से भटकाया जा सके। इस तरह की मनगढ़ंत गिरफ्तारियां और बिना जांच के जासूसी का तमगा देना इस बात का सबूत है कि वहां की मौजूदा व्यवस्था में पेशेवर निष्पक्षता और न्याय की गुंजाइश लगभग खत्म होती जा रही है, जो पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी खतरनाक संकेत है।

आने वाले दिनों में और अधिक गहरा सकता है कूटनीतिक संकट

इस ताजा घटना ने दोनों देशों के बीच के आपसी भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है। सरहद के दोनों तरफ बैठे नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों के बीच अविश्वास की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। यदि बांग्लादेश का प्रशासन इसी तरह उकसावे वाली कार्रवाई करता रहा और भारतीय नागरिकों को बेवजह तंग करने का सिलसिला नहीं थमा, तो भारत की तरफ से भी कड़े आर्थिक या आवाजाही संबंधी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, बांग्लादेश में जिस प्रकार से राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत विरोधी कार्ड खेला जा रहा है, वह न केवल उस देश की अदूरदर्शिता को दर्शाता है बल्कि यह भी साबित करता है कि वहां अल्पसंख्यकों और विदेशियों के लिए हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं।