Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अप्रैल की शुरुआत के साथ ही देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाला है। इसके प्रभाव से 2 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच दिल्ली-NCR समेत देश के 15 राज्यों में आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और भारी बारिश की संभावना है।
अगले 4 दिनों का सटीक पूर्वानुमान (2-5 अप्रैल)
2 अप्रैल: पूर्वी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में 30-40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और हल्की बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय समेत पूर्वोत्तर राज्यों में भी अच्छी बारिश के आसार हैं।
3 और 4 अप्रैल (सबसे ज्यादा असर): इन दो दिनों में मौसम अपने चरम पर होगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हिमपात (Snowfall) होगा, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश होगी।
ओलावृष्टि की चेतावनी: मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि (Hailstorm) का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 50 से 70 किमी/घंटा तक जा सकती है।
क्षेत्रवार मौसम की स्थिति
| क्षेत्र | प्रभावित राज्य | मौसम का प्रकार |
|---|---|---|
| उत्तर-पश्चिम | दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी | आंधी, बारिश और ओलावृष्टि |
| पहाड़ी क्षेत्र | जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड | भारी हिमपात और बिजली गिरना |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, विदर्भ | अगले 5 दिनों तक गरज के साथ बौछारें |
| पूर्वी भारत | ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल | छिटपुट बारिश और तेज हवाएं |
| पश्चिम भारत | गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा | 4 अप्रैल तक बारिश और गर्जना |
तापमान और गर्मी से राहत
मौसम विभाग के अनुसार, इस सक्रिय विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में 6 अप्रैल तक दिन का तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की उम्मीद है, जिससे लोगों को समय से पहले शुरू हुई गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, दक्षिण और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों जैसे केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 4 अप्रैल तक उमस भरी गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा।
सावधानी बरतने की सलाह
तेज आंधी के दौरान कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए किसान अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
आसमान में बिजली कड़कने के समय खुले मैदान या पेड़ों के नीचे शरण न लें।




