Prabhat Vaibhav,Digital Desk : माह-ए-रमजान अपने अंतिम पड़ाव पर है और आज यानी 18 मार्च, बुधवार को दुनिया भर के मुसलमान 28वां रोजा रख रहे हैं। रमजान का यह तीसरा और आखिरी अशरा 'नजात' (जहन्नुम की आग से आजादी) का माना जाता है, जिसमें रोजेदार अल्लाह की इबादत में पूरी तरह डूबे हुए हैं। जैसे-जैसे ईद-उल-फितर करीब आ रही है, बाजारों में रौनक और मस्जिदों में दुआओं का सिलसिला तेज हो गया है। रोजेदारों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे अपने शहर के अनुसार सहरी और इफ्तार के सही समय का ध्यान रखें, क्योंकि सूरज के निकलने और डूबने के समय में भौगोलिक बदलाव के कारण कुछ मिनटों का अंतर होता है।
सहरी और इफ्तार का महत्व: रूहानी सुकून का वक्त
रमजान में सहरी वह भोजन है जो सूर्योदय से पहले रोजा शुरू करने के लिए किया जाता है, जबकि इफ्तार सूर्यास्त के समय रोजा खोलने का समय होता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सहरी करना सुन्नत है और इसमें बरकत होती है। वहीं, इफ्तार के वक्त की गई दुआएं अल्लाह की बारगाह में तुरंत कुबूल होती हैं। आज 28वें रोजे के अवसर पर देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और पटना में समय सारिणी जारी कर दी गई है। रोजेदारों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मस्जिदों के एलान और विश्वसनीय कैलेंडर के अनुसार ही अपना रोजा शुरू और खत्म करें।
प्रमुख शहरों में आज की समय सारिणी (18 मार्च 2026)
आज के दिन दिल्ली में सहरी का समय सुबह लगभग 5:08 बजे और इफ्तार शाम 6:32 बजे के करीब होगा। वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सहरी 4:54 बजे और इफ्तार 6:18 बजे होगा। मुंबई में तटीय स्थिति के कारण सहरी 5:29 बजे और इफ्तार 6:51 बजे का अनुमान है। कोलकाता में समय काफी पहले होता है, वहां सहरी 4:26 बजे और इफ्तार 5:48 बजे होगी। इसी तरह पटना में सहरी 4:41 बजे और इफ्तार 6:02 बजे के आसपास रहने की संभावना है। (नोट: स्थानीय स्तर पर 1-2 मिनट का अंतर संभव है)।
अंतिम अशरे की इबादत और ईद की तैयारी
रमजान का 28वां रोजा होने के नाते अब सभी की नजरें चांद के दीदार पर टिकी हैं। अगर चांद 29वें रोजे को नजर आता है तो ईद अगले दिन होगी, अन्यथा 30 रोजे पूरे होने के बाद ईद मनाई जाएगी। इस समय मस्जिदों में 'एतिकाफ' (मस्जिद में एकांत इबादत) करने वाले रोजेदार खुदा से मगफिरत की दुआएं मांग रहे हैं। साथ ही लोग जकात और फितरा (दान) निकालकर गरीबों की मदद भी कर रहे हैं ताकि हर कोई खुशियों के साथ ईद मना सके। बाजारों में सेवइयों, खजूर और नए कपड़ों की खरीदारी भी अब अपने चरम पर पहुंच गई है।
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