Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के बाद देहरादून जिले में वर्षों से जर्जर और बच्चों के लिए खतरनाक बने 76 स्कूल भवनों को ध्वस्त करने का फैसला लिया गया है। यह कार्रवाई बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही को खत्म करने के लिए की जा रही है।
जिले के 79 विद्यालय भवन निष्प्रोज्य पाए गए
जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में 10 दिनों में 100 स्कूल भवनों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार 79 विद्यालय भवन पूरी तरह निष्प्रोज्य पाए गए। इनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा 17 स्कूल आंशिक रूप से जर्जर और केवल 8 स्कूल फिलहाल सुरक्षित पाए गए।
ध्वस्तीकरण और वैकल्पिक व्यवस्था
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन 63 स्कूलों में वैकल्पिक पढ़ाई की व्यवस्था पहले ही शुरू हो चुकी है, वहां तुरंत ध्वस्तीकरण किया जाएगा। शेष 16 विद्यालयों में पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, उसके बाद भवन गिराए जाएंगे। इसके लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। लोक निर्माण विभाग को सात दिन में आंगन तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वर्षों की लापरवाही उजागर
जांच में सामने आया कि कई स्कूल भवन पिछले पांच से 10 साल से जर्जर स्थिति में थे, लेकिन न तो समय पर निरीक्षण हुआ और न ही किसी ने रिपोर्ट दर्ज की। शिक्षा विभाग और निर्माण एजेंसियों के बीच जिम्मेदारी तय न होने के कारण बच्चों की सुरक्षा खतरे में रही। मामूली मरम्मत कर फाइल बंद कर दी जाती रही, जबकि वास्तविक जरूरत भवन खाली करने और ध्वस्तीकरण की थी।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा, “अब किसी भी जर्जर भवन में पढ़ाई नहीं होगी। प्रशासन समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”




