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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 के आगाज से पहले केंद्र सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली से लेकर देहरादून तक बैठकों का दौर जारी है। इस बार यात्रा को अभेद्य सुरक्षा घेरे में रखने के लिए केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की 15 कंपनियां उत्तराखंड भेजने का बड़ा फैसला लिया है।

केंद्रीय गृह सचिव ने खुद संभाली कमान, तैयारियों की हुई हाई-लेवल समीक्षा

हाल ही में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने उत्तराखंड का दौरा कर चारधाम यात्रा की तैयारियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव आनंद वर्धन और अन्य उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। गृह सचिव ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

ऋषिकेश से बद्री-केदार तक तैनात होंगे जवान

राज्य सरकार को केंद्र से आश्वासन मिला है कि अर्धसैनिक बलों की ये 15 कंपनियां मई 2026 की शुरुआत तक उत्तराखंड पहुंच जाएंगी। इन जवानों को ऋषिकेश के प्रवेश द्वार से लेकर बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के मुख्य मंदिर परिसरों और यात्रा मार्गों पर तैनात किया जाएगा। इनका मुख्य कार्य भीड़ नियंत्रण (Crowd Management), संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और आपातकालीन स्थिति में स्थानीय पुलिस की सहायता करना होगा।

विदेशी मेहमानों और बढ़ती भीड़ के लिए विशेष इंतजाम

2026 की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। तीर्थयात्रियों में न केवल भारत के विभिन्न राज्यों के लोग शामिल हैं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी साल-दर-साल बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए हेलीकॉप्टर सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दुर्गम रास्तों पर भी यात्रियों को किसी भी बाधा का सामना न करना पड़े।

समन्वय से सफल होगी यात्रा: राज्य और केंद्र का साझा मिशन

प्रशासन के अनुसार, केंद्रीय गृह सचिव के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। आपदा प्रबंधन की टीमें यात्रा मार्ग के संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन पर तैनात की जा रही हैं। केंद्र और राज्य के बीच यह तालमेल स्पष्ट करता है कि इस बार की चारधाम यात्रा को न केवल आस्था का महापर्व, बल्कि सुरक्षा और प्रबंधन का एक मॉडल बनाने की कोशिश की जा रही है।