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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची रार अब खुलकर सामने आ गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें 'कम्प्रोमाइज्ड' (समझौता कर चुके) करार दिया है। चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मान ने चड्ढा पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे पार्टी की लाइन से हटकर चल रहे हैं और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय 'सॉफ्ट पीआर' (PR) में व्यस्त हैं।

पार्टी व्हिप के खिलाफ जाने का आरोप

मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट किया कि राघव चड्ढा संसद में उन मुद्दों पर बोलने से बच रहे हैं जो पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पार्टी लाइन का उल्लंघन: मान ने कहा कि यदि कोई सांसद पश्चिम बंगाल में चुनावी धांधली, एमएसपी (MSP), जीएसटी (GST) या गुजरात में आप कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी जैसे गंभीर मुद्दों पर संसद से वॉकआउट करने या आवाज उठाने के बजाय चुप रहता है, तो यह सीधे तौर पर पार्टी व्हिप का उल्लंघन है।

गंभीरता की कमी: सीएम मान ने चुटकी लेते हुए कहा, "जब देश और पार्टी के सामने बड़े संकट हों, तब कोई सांसद समोसे की कीमतों या पिज्जा डिलीवरी जैसे हल्के मुद्दे उठाता है, तो शक होना लाजमी है कि वह व्यक्ति कहीं और के इशारे पर बोल रहा है।"

राज्यसभा में पद से हटाए जाने पर घमासान

हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी थी कि उन्हें "खामोश किया गया है, हराया नहीं गया।"

मान का जवाब: इस पर मान ने उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टियों में नेतृत्व बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने 2014 का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे डॉ. धर्मवीर गांधी के बाद उन्होंने खुद संसदीय बोर्ड की कमान संभाली थी।

अनुराग ढांडा का प्रहार: आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी चड्ढा की आलोचना करते हुए सवाल उठाया, "क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरने वाला व्यक्ति देश के लिए लड़ सकता है?"

गुजरात के मुद्दे पर आर-पार

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि गुजरात में आम आदमी पार्टी के 160 कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर वह गुजरात के मुख्यमंत्री के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अब उन नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी जो सामूहिक निर्णयों और व्हिप का पालन नहीं कर रहे हैं।

इस राजनीतिक बयानबाजी ने संकेत दे दिए हैं कि आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और राघव चड्ढा के बीच दूरियां काफी बढ़ गई हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में पार्टी की आंतरिक राजनीति पर साफ दिखेगा।