Prabhat Vaibhav,Digital Desk : विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने कड़ा रुख अपनाया है। ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में पेड़ों की कटाई, छंटाई और स्थानांतरण के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है। इस नए आदेश के तहत, ताजमहल के आस-पास के पर्यावरण को बचाने के लिए नियमों को और अधिक पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है।
5 किमी के दायरे में 'जीरो टॉलरेंस'
सुप्रीम कोर्ट के 8 मई 2015 के आदेश को यथावत रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि:
अनिवार्य अनुमति: ताजमहल की 5 किमी की परिधि (Aerial Distance) के भीतर किसी भी पेड़ को काटने से पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
मंडलायुक्त की जिम्मेदारी: टीटीजेड (TTZ) अथॉरिटी के चेयरमैन और मंडलायुक्त को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस संवेदनशील क्षेत्र में पेड़ों को कोई क्षति न पहुंचे।
परिधि के बाहर के लिए क्या हैं नियम?
ताजमहल के 5 किमी दायरे के बाहर पेड़ काटने के लिए प्रक्रिया को दो भागों में बांटा गया है:
49 पेड़ों तक: यदि पेड़ों की संख्या 49 तक है, तो आवेदन डीएफओ (DFO) कार्यालय में किया जा सकता है।
49 से अधिक पेड़: यदि 49 से ज्यादा पेड़ काटने हैं, तो डीएफओ आवेदन स्वीकार नहीं करेगा। इसके लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी होगी।
कृषि भूमि के लिए नियम: यूकेलिप्टस, पोपलर और मेलिया ड्यूबिया जैसी प्रजातियों के लिए नोटरी प्रमाणित दस्तावेज और यह हलफनामा देना होगा कि भूमि का उपयोग गैर-कृषि कार्य के लिए नहीं बदला जा रहा है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
पेड़ काटने की अनुमति चाहने वाले आवेदक को निम्नलिखित जानकारी देनी होगी:
भूमि स्वामित्व के पंजीकृत दस्तावेज और जियो रिफ्रेंस्ड (Geo-referenced) तस्वीरें।
प्रतिपूरक पौधारोपण (Compensatory Afforestation) के लिए प्रस्तावित स्थल की जानकारी।
यह लिखित वचन कि पेड़ काटने का उद्देश्य भूमि के लैंड यूज को बदलना नहीं है।
बिजली निगम और सूखे पेड़ों पर नियम
बिजली लाइन: यदि बिजली निगम हाईटेंशन लाइन के पास पेड़ों की छंटाई करता है, तो उसे उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 के तहत नए पेड़ लगाने का खर्च पहले जमा करना होगा।
सूखे और रोगग्रस्त पेड़: टीटीजेड क्षेत्र में सूखे या गिरे हुए पेड़ों को हटाने के लिए भी अब सीधे हाथ नहीं लगाया जा सकेगा, इसके लिए सीईसी (CEC) में आवेदन करना होगा और निरीक्षण के बाद ही अनुमति मिलेगी।
समय सीमा और रिपोर्टिंग
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह तय किया गया है कि डीएफओ या सीईसी द्वारा दी गई किसी भी अनुमति की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करनी होगी। इन नियमों का उल्लंघन करने पर न केवल अनुमति रद्द की जाएगी, बल्कि आवेदक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आगरा और ताजमहल के आस-पास के हरित क्षेत्र (Green Cover) को सुरक्षित रखना है, जो प्रदूषण से ताज के संगमरमर को बचाने में ढाल का काम करता है।




