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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को माहौल उस वक्त बेहद गर्म हो गया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण विधेयक) को लेकर विपक्ष पर सीधा और तीखा हमला बोला। सीएम धामी ने संसद में इस विधेयक के दौरान हुए विरोध का जिक्र करते हुए विपक्षी गठबंधन की तुलना महाभारत काल की "कौरवों की सभा" से कर दी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

विपक्ष पर महिला सशक्तिकरण की राह रोकने का आरोप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस विधेयक के मार्ग में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न कीं। धामी ने कहा, "जिस प्रकार कुछ विपक्षी नेताओं ने महिला सम्मान से जुड़े इस विधेयक पर प्रतिक्रिया दी, वह दृश्य महाभारत की उस सभा की याद दिलाता है जहां नारी के सम्मान को दरकिनार किया गया था।"

चिपको आंदोलन और मातृशक्ति का गौरव

सदन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि गौरा देवी के नेतृत्व में हुए 'चिपको आंदोलन' ने पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था। धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ने न केवल राज्य निर्माण आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई, बल्कि वे आज भी राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि "नारी वंदन" केवल एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि सरकार का अटूट संकल्प है।

कांग्रेस का पलटवार: 'मुद्दों का हो रहा राजनीतिकरण'

मुख्यमंत्री के तीखे प्रहारों पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा ऐतराज जताया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील और गंभीर मुद्दे का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ लेने और विपक्ष को बदनाम करने के लिए कर रही है। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके लागू होने की समयसीमा और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

बहस के दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लागू होने में परिसीमन (Delimitation) और जनगणना (Census) की शर्त पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई। विपक्ष का तर्क है कि इन शर्तों के कारण महिलाओं को आरक्षण मिलने में लंबा इंतजार करना पड़ेगा, जबकि सरकार का कहना है कि यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अंत में अपील की कि मातृशक्ति के सम्मान और उनके अधिकारों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने का आग्रह किया ताकि महिलाओं को उनका हक जल्द से जल्द मिल सके।