Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम और शासन की पोल खोल कर रख दी है। मामला प्रदेश की कद्दावर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के निर्वाचन क्षेत्र सोमेश्वर का है, जहां सड़क सुविधा न होने के कारण एक बीमार बुजुर्ग की जान पर बन आई। बदहाल रास्तों और सरकारी उपेक्षा का आलम यह रहा कि ग्रामीणों को विवश होकर बुजुर्ग को अपने कंधों पर लादकर मीलों पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
मंत्री जी का क्षेत्र और 'डिजिटल इंडिया' की बदहाली
हैरानी की बात यह है कि सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पिछले करीब 9 वर्षों से रेखा आर्या कर रही हैं, जो वर्तमान में धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। बावजूद इसके, उनके अपने क्षेत्र के बयाला खालसा के बिलौरी तोक तक आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब क्षेत्र का विधायक खुद सरकार में मंत्री हो, तब भी अगर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़े, तो आम जनता किससे उम्मीद लगाए?
10 साल से सिर्फ आश्वासन की 'सड़क', धरातल पर सन्नाटा
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, वे पिछले एक दशक से गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। चुनाव आते हैं, वादे किए जाते हैं, लेकिन वोट पड़ने के बाद फाइलें फिर से ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। क्षेत्रवासी राजू भट्ट ने सरकार और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश में 10 साल से भाजपा की सरकार है, लेकिन एक गांव की किस्मत नहीं बदल सकी। उन्होंने इसे सरकार की गंभीर विफलता करार दिया है।
इलाज के लिए 'जान जोखिम' में डालने को मजबूर पहाड़ी
पहाड़ के दुर्गम रास्तों पर बीमारों और बुजुर्गों को ले जाना किसी युद्ध जीतने से कम नहीं है। बिलौरी तोक के ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक और जानलेवा हो जाता है। आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि जल्द ही इस मार्ग को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे।
PWG और प्रशासन के दावों की खुली पोल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो ने एक बार फिर पहाड़ के 'दर्द' को दुनिया के सामने रख दिया है। एक तरफ राज्य सरकार पर्यटन और बेहतर कनेक्टिविटी के दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ मंत्री के गृह क्षेत्र में ही मरीज को कंधों पर ढोया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन जागता है या फिर सोमेश्वर के इन गांवों की किस्मत में अभी और इंतजार लिखा है।




