Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ते खान-पान के बीच कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी धीरे-धीरे अपने पैर पसार रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 'पेट का कैंसर' (Stomach Cancer) एक ऐसी बीमारी है जो शुरुआत में बेहद शांत रहती है और इसके लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है। मेडिकल साइंस में इसे एक 'साइलेंट किलर' माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शरीर द्वारा दिए जा रहे कुछ मामूली संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो इस घातक बीमारी से बचाव और सफल इलाज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
पेट में लगातार जलन और अपच को न समझें साधारण समस्या
ज्यादातर लोग पेट में होने वाली जलन, एसिडिटी या गैस को खराब खान-पान का नतीजा मानकर एंटासिड दवाएं ले लेते हैं। लेकिन अमर उजाला की हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, यदि आपको लंबे समय से पेट के ऊपरी हिस्से में बेचैनी, भारीपन या खाना खाने के तुरंत बाद पेट भरा हुआ महसूस हो रहा है, तो यह पेट के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। कैंसर कोशिकाएं जब पेट की परत को प्रभावित करना शुरू करती हैं, तो पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली बाधित होने लगती है। यदि यह समस्या दो हफ्ते से ज्यादा बनी रहती है, तो तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
बिना कारण वजन गिरना और भूख में कमी है खतरे की घंटी
क्या आपका वजन बिना किसी डाइटिंग या एक्सरसाइज के अचानक कम होने लगा है? विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना किसी प्रयास के वजन का तेजी से गिरना शरीर में पनप रही किसी गंभीर बीमारी का इशारा है। पेट के कैंसर के मामलों में ट्यूमर शरीर की ऊर्जा का उपभोग करने लगता है, जिससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और मरीज को भूख लगना कम हो जाता है। इसके अलावा, निगलने में कठिनाई होना (Dysphagia) या पेट में गांठ जैसा महसूस होना भी इस बीमारी के एडवांस स्टेज की ओर इशारा करता है। इन लक्षणों को केवल कमजोरी समझकर टालना जानलेवा साबित हो सकता है।
मतली और थकान को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
पेट के कैंसर के मरीजों में अक्सर खून की कमी यानी एनीमिया देखा जाता है, क्योंकि कैंसर की वजह से पेट के अंदरूनी हिस्सों से सूक्ष्म रक्तस्राव हो सकता है। इसके कारण मरीज को हर समय थकान, कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत रहती है। यदि आपको बार-बार मतली (जी मिचलाना) या उल्टी महसूस होती है, या मल का रंग गहरा काला आता है, तो यह पेट के अंदरूनी हिस्से में रक्तस्राव का पक्का संकेत हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि 40 की उम्र पार कर चुके लोगों को अपने पाचन स्वास्थ्य के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज: स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
पेट के कैंसर के खतरे को कम करने के लिए खान-पान में बदलाव सबसे जरूरी है। अत्यधिक तला-भुना, प्रोसेस्ड मीट और बहुत ज्यादा नमक वाला भोजन कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इसके बजाय ताजे फल, हरी सब्जियां और फाइबर युक्त आहार को प्राथमिकता दें। धूम्रपान और शराब का सेवन पेट की लाइनिंग को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। समय-समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग के जरिए इस बीमारी को पहले चरण में ही पकड़ा जा सकता है, जिससे मरीज की जान बचाना आसान हो जाता है।
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