Prabhat Vaibhav,Digital Desk : खूबसूरत दिखने की चाहत में ब्यूटी पार्लर जाना महिलाओं की दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि थ्रेडिंग या आईब्रो ठीक कराने की एक छोटी सी प्रक्रिया आपको उम्र भर का दर्द दे सकती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए चेतावनी दी है कि ब्यूटी पार्लर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की अनदेखी आपके लिवर को बुरी तरह डैमेज कर सकती है। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि आईब्रो का सीधा संबंध लिवर से कैसे है, लेकिन इसके पीछे छिपा 'हेपेटाइटिस' (Hepatitis) का खतरा बेहद गंभीर है। डॉक्टरों के अनुसार, पार्लर में साफ-सफाई की कमी आपको एक ऐसी लाइलाज बीमारी की ओर धकेल सकती है, जिसका असर सालों बाद पता चलता है।
थ्रेडिंग के दौरान कट लगना बन सकता है संक्रमण का द्वार
पार्लर में आईब्रो बनवाते समय अक्सर धागे से त्वचा पर छोटे-छोटे कट लग जाते हैं या खून निकल आता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि ब्यूटीशियन एक ही धागे या दूषित कैंची/चिमटी (Tweezers) का इस्तेमाल एक से अधिक ग्राहकों पर करती है, तो रक्त के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे खतरनाक वायरस इसी रास्ते से आपके शरीर में प्रवेश करते हैं। ये वायरस सीधे लिवर पर हमला करते हैं और धीरे-धीरे उसे पूरी तरह खराब कर देते हैं। चूंकि लिवर डैमेज के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग इसे साधारण स्किन इंफेक्शन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
संक्रमित उपकरणों से 'सिरोसिस' और 'लिवर कैंसर' का जोखिम
अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में डॉक्टरों ने साफ किया है कि पार्लर में उपयोग होने वाली सुइयां, ब्लेड या चिमटी को अगर सही तरीके से स्टरलाइज (कीटाणुमुक्त) न किया जाए, तो यह हेपेटाइटिस के प्रसार का मुख्य कारण बनता है। हेपेटाइटिस का संक्रमण लंबे समय तक शरीर में रहने पर लिवर सिरोसिस और अंततः लिवर कैंसर का रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट भी मानती है कि असुरक्षित ब्यूटी ट्रीटमेंट वैश्विक स्तर पर हेपेटाइटिस फैलने के बड़े कारणों में से एक हैं। आईब्रो सेट कराने के चक्कर में लिवर को दांव पर लगाना आपकी जान के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।
पार्लर जाते समय इन 3 बातों का रखें विशेष ख्याल
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि पार्लर जाते समय कुछ सावधानियां बरतकर आप इस खतरे से बच सकती हैं। सबसे पहले, सुनिश्चित करें कि ब्यूटीशियन आपके सामने नए और साफ धागे का उपयोग करे। दूसरा, यदि संभव हो तो थ्रेडिंग के लिए अपनी खुद की चिमटी या कैंची साथ ले जाएं। तीसरा, आईब्रो बनवाने के बाद कट लगने पर तुरंत एंटीसेप्टिक लोशन का उपयोग करें। यदि आपको पार्लर जाने के कुछ हफ्तों बाद अत्यधिक थकान, पीलिया के लक्षण या पेट में दर्द महसूस होता है, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाएं।
जागरूकता ही है सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
ब्यूटी इंडस्ट्री में हाइजीन मानकों को लेकर सख्त नियमों की कमी के कारण ग्राहकों को खुद ही जागरूक होना होगा। केवल चमक-धमक देखकर पार्लर का चुनाव न करें, बल्कि वहां इस्तेमाल होने वाले टूल्स की सफाई पर गौर करें। याद रखें, बाहरी खूबसूरती के लिए आंतरिक अंगों, विशेषकर लिवर की सेहत से समझौता करना समझदारी नहीं है। अपनी ब्यूटीशियन से खुलकर बात करें और उन्हें डिस्पोजेबल टूल्स या प्रॉपर सैनिटाइजेशन के लिए टोकने में संकोच न करें। आपकी थोड़ी सी सतर्कता आपको लिवर की गंभीर बीमारियों से बचा सकती है।
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