Prabhat Vaibhav,Digital Desk : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow-Kanpur Expressway) का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। 'तारीख पर तारीख' के फेर में फंसे इस 63 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के संचालन को लेकर अब भी अनिश्चितता बरकरार है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा दी गई 31 मार्च 2026 की ताजा समय-सीमा भी बीत चुकी है, लेकिन धरातल पर काम अब भी शेष है।
5 बार बढ़ चुकी है संचालन की तारीख
इस एक्सप्रेसवे का निर्माण जुलाई 2025 तक पूरा होना था, लेकिन तब से लेकर अब तक NHAI पांच बार नई तारीखें घोषित कर चुका है:
31 जुलाई 2025: पहली डेडलाइन (सिर्फ 70% काम हुआ)।
31 अक्टूबर 2025: दूसरी डेडलाइन (काम की रफ्तार धीमी रही)।
31 दिसंबर 2025: तीसरी डेडलाइन (बिजली लाइनों की शिफ्टिंग का बहाना)।
28 फरवरी 2026: चौथी डेडलाइन (PMO को पत्र लिखकर मार्च तक काम पूरा करने का दावा)।
31 मार्च 2026: पांचवीं डेडलाइन (रक्षा मंत्री को आश्वासन देने के बावजूद काम अधूरा)।
रैंप और सड़क का काम अब भी 'अंडर कंस्ट्रक्शन'
एक्सप्रेसवे के 63 किलोमीटर में से 45 किलोमीटर का हिस्सा ग्रीनफील्ड है, लेकिन यहां कनेक्टिविटी के काम अधूरे हैं:
शिवपुर (खांडेदेव): यहां एक्सप्रेसवे पर चढ़ने और उतरने वाले रैंप पर सड़क बिछाने का काम अभी बाकी है।
हरौनी और जुनाबगंज: इन दोनों महत्वपूर्ण जंक्शनों को कनेक्ट करने वाले 250-250 मीटर के रैंप पर अब तक डामर की सड़क नहीं बन सकी है।
फ्लाईओवर: कई स्थानों पर फ्लाईओवर के ऊपर सड़क बनाने का काम 11 अप्रैल तक जारी है।
मूलभूत सुविधाओं का अता-पता नहीं: ट्रामा सेंटर और रेस्तरां सिर्फ कागजों पर
एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से पर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए ट्रामा सेंटर और रेस्तरां बनाए जाने थे। इसकी जिम्मेदारी 'इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड' (IHMCL) को सौंपी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि:
पिछले दो सालों में सिर्फ जमीन की बैरिकेडिंग की गई है।
मौके पर निर्माण सामग्री तक नहीं पहुंची है, काम शुरू होना तो दूर की बात है।
ऐसे में एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद भी यात्रियों को आपातकालीन चिकित्सा या खान-पान की सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना होगा।
कार्यदायी संस्था पर मेहरबानी?
हैरानी की बात यह है कि प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी के बावजूद कार्यदायी संस्था पीएनसी (PNC) पर NHAI ने क्या कार्रवाई की या कितना जुर्माना लगाया, इसे लेकर कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। 13 मार्च को ग्रीन कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान रक्षा मंत्री को 31 मार्च तक काम पूरा होने का भरोसा दिया गया था, जो अब हवा-हवाई साबित हो रहा है।
63 किमी के इस सफर को 45 मिनट से 1 घंटे में पूरा करने का सपना देखने वाले लखनऊ और कानपुर के लोगों के लिए अब भी 'सब्र' ही एकमात्र रास्ता बचा है।




