Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) और उनके 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर जमकर निशाना साधा। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा का चरित्र हमेशा से महापुरुषों के प्रति जातिगत द्वेष से भरा रहा है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण उनके द्वारा जिलों के नाम बदलना है।
ज्योतिबा फुले को नमन और शिक्षा का संदेश
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट करते हुए सामाजिक परिवर्तन के पितामह महात्मा ज्योतिबा फुले को नमन किया। उन्होंने फुले के प्रसिद्ध कथन "विद्या बिना मति गई..." का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के अभाव ने ही शोषित समाज को पीछे रखा है। मायावती ने नारी शिक्षा के क्षेत्र में ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले के योगदान को सुनहरे अक्षरों में दर्ज इतिहास बताया और कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी इसी विचारधारा से प्रेरणा ली थी।
'PDA का चाल, चरित्र और चेहरा अति दुखद'
सपा पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा कि सपा सरकार ने हमेशा से दलित और पिछड़े समाज के महापुरुषों का अपमान किया है। उन्होंने सपा के 'PDA' फॉर्मूले को घेरते हुए कहा:
नाम बदलने की राजनीति: बसपा सरकार ने अमरोहा जिले का नाम बदलकर 'ज्योतिबा फुले नगर' रखा था, जिसे सपा सरकार ने जातिवादी द्वेष के चलते बदल दिया।
अन्य जिलों का उदाहरण: मायावती ने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने कासगंज को कांशीराम नगर, कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर और हापुड़ को पंचशील नगर बनाया था।
संकीर्ण मानसिकता: मायावती ने आरोप लगाया कि सपा ने सरकार में आने पर इन जिलों का अस्तित्व तो बनाए रखा, लेकिन महापुरुषों के नाम हटा दिए। उन्होंने इसे पीडीए का 'अति दुखद चाल, चरित्र व चेहरा' करार दिया।
जातिगत द्वेष का आरोप
बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि सपा केवल राजनीति के लिए पिछड़ों और दलितों का नाम लेती है, लेकिन असलियत में वह महापुरुषों के सम्मान के खिलाफ काम करती है। उन्होंने जनता को आगाह किया कि महापुरुषों के नाम मिटाने वाली पार्टी कभी भी बहुजन समाज का भला नहीं कर सकती।
मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सभी दल दलित और पिछड़े वोटों को साधने में जुटे हैं। इस प्रहार के जरिए मायावती ने एक बार फिर दलित स्वाभिमान और महापुरुषों के सम्मान के मुद्दे को हवा दे दी है।




