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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : इंडोनेशिया में आज सुबह कुदरत ने जबरदस्त कहर ढाया है। मोलुक्का सागर क्षेत्र में आए बेहद शक्तिशाली भूकंप ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। रिक्टर स्केल पर 7.4 की तीव्रता वाले इस भूकंप के झटकों के बाद प्रशासन ने तुरंत सुनामी की चेतावनी (Tsunami Warning) जारी कर दी है। भूकंप इतना भीषण था कि लोग चीखते-चिल्लाते हुए अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। फिलहाल पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और राहत बचाव दल को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

भोर में आया जलजला: मोलुक्का सागर में था भूकंप का केंद्र

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप के यह विनाशकारी झटके स्थानीय समयानुसार सुबह 6:48 बजे महसूस किए गए। शुरुआत में वैज्ञानिकों ने इसकी तीव्रता 7.8 आंकी थी, लेकिन बाद में संशोधित कर इसे 7.4 बताया गया। भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर मोलुक्का सागर में होने के कारण पानी के भीतर बड़ी हलचल दर्ज की गई है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि झटके इतने तेज थे कि कई सेकंड तक जमीन लहरों की तरह डोलती रही, जिससे तटीय शहरों में भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

सुनामी का अलर्ट और तटीय इलाकों में मची भगदड़

भूकंप के केंद्र और गहराई को देखते हुए इंडोनेशियाई अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी करने में देरी नहीं की। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन एजेंसियों (National Disaster Management Authority) ने समुद्री किनारों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप के बाद समुद्र के जलस्तर में बदलाव देखा गया है, जिसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां चप्पे-चप्पे पर निगरानी रख रही हैं। अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मलबे और बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

आखिर क्यों इंडोनेशिया में बार-बार आता है इतना भीषण भूकंप?

इंडोनेशिया भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक हिस्से 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) पर स्थित है। यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक भूकंपीय और ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय माना जाता है। इंडोनेशिया के नीचे इंडो-ऑस्ट्रेलियाई, यूरेशियन और प्रशांत जैसी विशाल विवर्तनिक प्लेटें (Tectonic Plates) मौजूद हैं। इन प्लेटों के बीच होने वाली निरंतर हलचल और आपसी टकराव के कारण जमीन के नीचे भारी ऊर्जा जमा हो जाती है, जो समय-समय पर बड़े भूकंपों के रूप में बाहर निकलती है। इसी वजह से यहां भूकंप और सुनामी का खतरा हमेशा बना रहता है।