Prabhat Vaibhav,Digital Desk : लंबे समय तक यह माना जाता रहा है कि लिवर सिरोसिस या लिवर की खराबी केवल शराब के अत्यधिक सेवन से होती है। लेकिन चिकित्सा जगत में अब एक डरावना ट्रेंड सामने आ रहा है। डॉक्टर अब उन लोगों में भी लिवर सिरोसिस के मामले तेजी से देख रहे हैं जो शराब को हाथ तक नहीं लगाते। विशेषज्ञों ने इसे 'खामोश हत्यारा' (Silent Killer) करार दिया है, क्योंकि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को खोखला करती है और इसके लक्षण तब सामने आते हैं जब लिवर काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुका होता है।
क्यों बिना शराब के खराब हो रहा है लिवर?
डॉ. वसीम रमजान डार और डॉ. शंकर कुमार गुप्ता जैसे विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर की बीमारी अब केवल शराब तक सीमित नहीं है। भारत के शहरी क्षेत्रों में हर तीन में से एक व्यक्ति 'गैर-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग' (NAFLD) से ग्रस्त हो सकता है। इसके मुख्य कारण हैं:
खराब आहार: जंक फूड और अत्यधिक तेल-मसाले वाला खाना।
मोटापा और वजन बढ़ना: शरीर में जमा अतिरिक्त वसा लिवर पर दबाव डालती है।
मधुमेह (Diabetes): शुगर लेवल अनियंत्रित होने से लिवर में सूजन आने लगती है।
गतिहीन जीवनशैली: शारीरिक व्यायाम की कमी और घंटों एक जगह बैठकर काम करना।
लिवर सिरोसिस: कैसे बनता है 'खामोश हत्यारा'?
लिवर का मुख्य काम भोजन पचाना और शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालना है। जब गलत आदतों या वसा जमा होने के कारण लिवर पर बार-बार दबाव पड़ता है, तो वह खुद को ठीक करने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में वहां 'स्कार टिश्यू' (घाव के निशान) बनने लगते हैं। जब ये निशान पूरे लिवर में फैल जाते हैं, तो उसे सिरोसिस कहा जाता है, जिससे लिवर काम करना बंद कर देता है।
शुरुआती लक्षण जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज करते हैं:
अदालत ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती संकेत बहुत हल्के होते हैं, जिन्हें लोग सामान्य थकान मान लेते हैं:
लगातार कमजोरी और थकान महसूस होना।
भूख में अचानक कमी आना।
बिना किसी कारण के वजन गिरना।
पेट के दाहिने हिस्से में हल्की तकलीफ या भारीपन।
गंभीर होने पर दिखने वाले लक्षण: त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), पेट में पानी भरना (सूजन), और बार-बार संक्रमण होना।
बचाव के लिए क्या करें? विशेषज्ञों की सलाह
लिवर एक ऐसा अंग है जो शुरुआती चरणों में खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है। इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या में ये बदलाव करने होंगे:
पौष्टिक भोजन: घर का बना शुद्ध और कम तेल वाला खाना खाएं।
नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या वर्कआउट करें।
बीमारियों का प्रबंधन: अपने वजन और शुगर लेवल को हमेशा नियंत्रण में रखें।
बिना सलाह दवा न लें: डॉक्टर की पर्ची के बिना पेनकिलर या अन्य दवाइयां लेना लिवर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
नियमित जांच: समय-समय पर LFT (लिवर फंक्शन टेस्ट) और अल्ट्रासाउंड करवाते रहें।




