Prabhat Vaibhav,Digital Desk : नालंदा के बिहारशरीफ स्थित मघड़ा शीतला माता मंदिर में हुई हालिया भगदड़, जिसमें नौ श्रद्धालुओं की जान चली गई, उसने पूरे बिहार के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस हादसे के बाद जब भागलपुर के प्रमुख मंदिरों की पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। शहर के प्रतिष्ठित मंदिरों में सुरक्षा के नाम पर केवल सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जबकि भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) जैसे बुनियादी इंतजाम नदारद हैं।
प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा की बड़ी चूक: एक ही गेट से एंट्री और एग्जिट
पड़ताल के दौरान भागलपुर के कई बड़े मंदिरों में सुरक्षा संबंधी गंभीर खामियां पाई गईं, जो किसी भी बड़े उत्सव के दौरान जानलेवा साबित हो सकती हैं:
शिवशक्ति और जगन्नाथ मंदिर: आदमपुर स्थित शिवशक्ति मंदिर और नया बाजार के जगन्नाथ मंदिर की स्थिति सबसे अधिक संवेदनशील है। यहाँ प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही मुख्य द्वार है। भीड़ बढ़ने पर एक ही रास्ते से आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच दबाव बढ़ने से भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती है। जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा के दौरान उमड़ने वाली हजारों की भीड़ और आसपास की संकरी गलियां इस खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं।
बूढ़ानाथ मंदिर: हालांकि यहाँ प्रवेश और निकास के अलग-अलग द्वार हैं, लेकिन स्थायी पुलिस बल की कमी एक बड़ी समस्या है। मंदिर प्रबंधक बाल्मिकी सिंह के अनुसार, फिलहाल सुरक्षा केवल स्वयंसेवकों और कैमरों के भरोसे है।
भूतनाथ मंदिर: असामाजिक तत्वों और चोरी का अड्डा
शहर के भूतनाथ मंदिर की स्थिति और भी चिंताजनक है। यहाँ न केवल भीड़ नियंत्रण की समस्या है, बल्कि परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और चोरी की घटनाएं आम हो चुकी हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं (डॉ. तिरुपतिनाथ यादव और डॉ. संदीप) का कहना है कि असामाजिक तत्वों को टोकने पर विवाद की स्थिति बन जाती है। हालांकि, एसएसपी ने अप्रैल महीने से यहाँ पुलिस बल तैनात करने का आश्वासन दिया है।
सुरक्षा के नाम पर सिर्फ 'खानापूर्ति'
पड़ताल में सामने आया कि भागलपुर के अधिकतर मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था का ढांचा बेहद कमजोर है:
प्रशिक्षित गार्डों की कमी: सुरक्षा की जिम्मेदारी अप्रशिक्षित स्वयंसेवकों के कंधों पर है।
आपातकालीन योजना का अभाव: किसी अप्रिय घटना की स्थिति में भीड़ को सुरक्षित निकालने के लिए कोई 'इमरजेंसी प्लान' तैयार नहीं है।
अव्यवस्थित पार्किंग: मंदिरों के बाहर बेतरतीब खड़ी गाड़ियां एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड के रास्ते में बड़ी बाधा बन सकती हैं।
प्रशासन से सुरक्षा की गुहार
मंदिरों के पुजारियों और प्रबंधकों ने जिला प्रशासन से स्थायी पुलिस चौकियां बनाने और प्रमुख त्योहारों (जैसे सावन और शिवरात्रि) के अलावा भी नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। बिहारशरीफ की घटना से सबक लेते हुए भागलपुर के श्रद्धालु अब डरे हुए हैं और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।




