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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में जुए और सट्टेबाजी के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में 'उत्तराखंड सार्वजनिक जुआ निवारण विधेयक-2026' (Uttarakhand Public Gambling Prevention Bill, 2026) को मंजूरी दे दी गई है। यह नया कानून ब्रिटिश काल के पुराने 'सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867' की जगह लेगा। नए प्रावधानों के तहत जुआ खेलने और खिलाने वालों के लिए सजा और जुर्माने को इतना सख्त कर दिया गया है कि अपराधी अब इसे करने से पहले सौ बार सोचेंगे।

159 साल पुराना कानून खत्म, अब 'हार्ड कोर' सजा का दौर

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अब राज्य में सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलना, 'कॉमन गेमिंग हाउस' (जुए के अड्डे) चलाना और विभिन्न खेलों पर सट्टा लगाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देशों के अनुपालन में तैयार इस विधेयक में पहली बार अपराध करने और बार-बार अपराध दोहराने वालों के लिए अलग-अलग और कड़ी सजा का प्रावधान है।

सजा और जुर्माने का पूरा ब्यौरा (प्रस्तावित):

कैबिनेट सूत्रों के मुताबिक, नए कानून के तहत दंड की रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:

अड्डे चलाने वालों के लिए: यदि कोई व्यक्ति जुए का अड्डा चलाता पाया जाता है, तो उसे 3 से 5 साल तक की जेल और 5 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

जुआरियों के लिए: जुआ खेलते पकड़े जाने पर भी भारी जुर्माने के साथ कारावास का प्रावधान किया गया है।

ऑनलाइन सट्टेबाजी: नए कानून के दायरे में ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी (Online Betting) को भी शामिल करने की तैयारी है, ताकि डिजिटल माध्यम से हो रहे अवैध खेल पर लगाम कसी जा सके।

अवैध धर्मांतरण पर भी 'प्रहार': 10 लाख का जुर्माना और उम्रकैद

जुए के अलावा, धामी कैबिनेट ने 'उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक' को भी और अधिक सख्त बनाने पर मुहर लगाई है। अब राज्य में बलपूर्वक या लालच देकर कराए गए 'धर्मांतरण' के मामलों में अधिकतम आजीवन कारावास (Life Imprisonment) और 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान होगा। साथ ही, विदेशी फंडिंग के जरिए धर्मांतरण कराने वालों को 7 से 14 साल तक की कठोर सजा भुगतनी होगी।

अल्पसंख्यक आयोग और निजी विश्वविद्यालयों पर भी फैसला

कैबिनेट ने 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक-2026' को भी मंजूरी दी है, जिससे आयोग को अधिक अधिकार और एक निश्चित कार्यकाल मिलेगा। इसके अलावा, राज्य को 'एजुकेशन हब' बनाने की दिशा में नैनीताल और देहरादून में तीन नए निजी विश्वविद्यालय (माउंट वैली, तुलाज और शिवालिक यूनिवर्सिटी) स्थापित करने के प्रस्तावों को भी हरी झंडी दिखा दी गई है।