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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। इसी कड़ी में उत्तरकाशी जिले स्थित मां गंगा के पावन धाम 'गंगोत्री' के कपाट खुलने की तिथि और शुभ मुहूर्त का एलान कर दिया गया है। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हालांकि, इस बार की यात्रा शुरू होने से पहले एक महत्वपूर्ण निर्णय ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसके तहत धाम परिसर में गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है।

अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में होगा मां गंगा का स्वागत

गंगोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों और तीर्थ पुरोहितों की बैठक के बाद यह तय हुआ है कि अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर ही मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव से रवाना होकर गंगोत्री पहुंचेगी। परंपरा के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र और विशेष योगों के बीच मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इस पल का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उत्तरकाशी पहुंचने शुरू हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने यात्रियों की सुविधा के लिए पेयजल, आवास और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक: तीर्थ पुरोहितों का कड़ा फैसला

इस बार गंगोत्री धाम की यात्रा चर्चाओं में है क्योंकि मंदिर समिति और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने स्पष्ट कर दिया है कि धाम की मर्यादा और सनातन परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए गैर-सनातनियों का प्रवेश वर्जित रहेगा। समिति का तर्क है कि चारधाम केवल पर्यटन केंद्र नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था के सर्वोच्च केंद्र हैं। धाम परिसर के बाहर इस संबंध में सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) भी लगाए जाने की योजना है ताकि किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन को भी इस निर्णय से अवगत करा दिया गया है।

चारधाम यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

गंगोत्री के कपाट खुलने की घोषणा के साथ ही यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ धामों की यात्रा के लिए भी पंजीकरण (Registration) की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है। सीमावर्ती जिला होने के नाते उत्तरकाशी में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने गंगोत्री हाईवे पर सुचारू यातायात सुनिश्चित करने के लिए सभी संवेदनशील स्थानों पर काम पूरा कर लिया है। मां गंगा के दर्शन के लिए आतुर भक्तों के लिए यह यात्रा न केवल धार्मिक रूप से बल्कि आत्मिक शांति के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।