Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में शताब्दी समारोह का शुभारंभ ध्वज वंदन के साथ किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दलनायक डा. चिन्मय पंड्या, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और हजारों स्वयंसेवकों की उपस्थिति में नवसंकल्प के साथ बैरागी द्वीप में शताब्दी ध्वज लहराया गया।
CM धामी का संदेश: सनातन की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला आयोजन
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह सामान्य आयोजन नहीं है, इसमें 80 से अधिक देशों से प्रतिनिधि और स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस समारोह से जो सकारात्मक ऊर्जा निकलेगी, वह सनातन धर्म और भारत के लिए काम करेगी।
धामी ने ध्वज वंदन के दौरान कहा कि गायत्री परिवार किसी एक संगठन की सीमाओं में नहीं बंधा, बल्कि यह युग चेतना का प्रवाह है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के उत्थान की दिशा में कार्य करता है।
संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा को श्रद्धांजलि
समारोह गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक भी है।
देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना का स्मरण
धामी ने कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थस्थल भारत की आत्मा की धड़कन हैं और यह आध्यात्मिक चेतना समाज को नैतिक और सशक्त बनाती है।
डा. चिन्मय पंड्या: स्वयं को और दायित्व को खोजने का अवसर
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह समारोह वैराग्यपूर्ण एकांत का आयोजन नहीं है। यह पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के “खोया-पाया विभाग” का प्रतीक है, जहां व्यक्ति स्वयं और अपने दायित्व को पुनः खोजता है।
शताब्दी समारोह का उद्देश्य यही है कि विचार, आचरण और कर्म के स्तर पर सकारात्मक बदलाव आए।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का संदेश
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री शेखावत ने कहा कि सेवा, साधना और संस्कार का संगम इस शताब्दी समारोह को नवयुग निर्माण का मील का पत्थर बनाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव के विकास से सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का निर्माण संभव है।
सम्मानित हुए प्रतिष्ठित व्यक्तित्व
समारोह में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी संपूर्णानंद, स्वामी वेलु बापू, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह, न्यायाधीश परविंदर सिंह सहित अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को गंगाजली, रुद्राक्ष माला और शांतिकुंज प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया।
शैलदीदी ने स्वयंसेवकों को प्रेरित किया
ध्वज वंदन समारोह में उपस्थित अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख शैलदीदी ने स्वयंसेवकों को निस्वार्थ सेवा, अनुशासन और समर्पण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के त्याग और तपस्या की गाथा साझा कर स्वयंसेवकों को युग निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
शैलदीदी ने शताब्दी समारोह में स्थापित स्मारक, विराट पुस्तक मेला और भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसे युग चेतना के विस्तार का सशक्त माध्यम बताया।
शांतिकुंज के अन्य वरिष्ठों का योगदान
शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि और गौरीशंकर सैनी ने भी समारोह में विचार साझा किए और स्वयंसेवकों तथा प्रतिभागियों को युग चेतना को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।




