Prabhat Vaibhav,Digital Desk : इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सरकारी पानी से फैली एक गंभीर बीमारी ने 16 लोगों की जान ले ली है। इस त्रासदी के बाद पूरा शहर शोक में डूबा हुआ है। नर्मदा पाइपलाइन से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में घातक बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। एबीपी न्यूज की जांच और लैब रिपोर्ट के आधार पर सामने आई इस जानकारी ने पूरी व्यवस्था को संकट में डाल दिया है।
भागीरथपुरा से लिए गए
पानी के नमूनों की जांच में फेकल कोलीफॉर्म, ई. कोलाई और क्लेबसिएला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। ये बैक्टीरिया उल्टी, दस्त और गंभीर आंतों की बीमारियों का कारण बनते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ नमूनों में विब्रियो कोलेरी जैसे तत्व भी पाए गए हैं, जो हैजा का कारण बनता है। अब तक लगभग 80 नमूनों की जांच की जा चुकी है और कुछ की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार, पूरी और विस्तृत प्रयोगशाला रिपोर्ट आने में 1 से 2 दिन लग सकते हैं।
लोग तीन साल से गंदा पानी पी रहे हैं।
यह मुद्दा सिर्फ पानी की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। इंदौर नगर निगम के तीन साल पुराने एक आंतरिक ज्ञापन में कहा गया है कि भागीरथपुरा के लोग तीन साल से अधिक समय से गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पानी की पाइपलाइनों में सीवेज और मूत्र पाया गया था। यह ज्ञापन तत्कालीन नगर आयुक्त प्रतिभा ने 2022 में लिखा था। इस समस्या के समाधान के लिए जनवरी 2023 में बजट पारित किया गया था, लेकिन अभी तक कोई नई पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है।
16 लोगों की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है?
इस लापरवाही के परिणाम अब घातक साबित हो रहे हैं। अब तक गंदा पानी पीने से 16 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 200 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार की हालत गंभीर है। इस संकट से लगभग 1,500 लोग प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में जाने जाने वाले इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था पर अब बड़े सवाल उठ रहे हैं। राष्ट्र के लिए एक मिसाल के तौर पर पेश की जाने वाली यह व्यवस्था अपने नागरिकों की जान बचाने में नाकाम रही है। सीधा सवाल यह है कि इतने वर्षों से चली आ रही इस उपेक्षा और देरी के लिए कौन जिम्मेदार है?




