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Prabhat Vaibhav, Digital Desk : एक तरफ जहां मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी संघर्ष ने वैश्विक व्यापार जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर भारत आज न्यूजीलैंड के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने जा रहा है। 27 अप्रैल 2026 को होने वाला यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के नए युग की शुरुआत करेगा।

भारत मंडपम में सजेगा निवेश का बाजार

पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस बहुप्रतीक्षित समझौते पर आज नई दिल्ली के प्रतिष्ठित 'भारत मंडपम' में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस विशेष अवसर पर भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि इस समझौते के लिए वार्ताओं का दौर पिछले साल 22 दिसंबर 2025 को ही पूरा हो गया था, और अब चार महीने के इंतजार के बाद इसे आधिकारिक रूप दिया जा रहा है।

20 अरब डॉलर के निवेश और व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य

इस मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का प्राथमिक उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्तमान व्यापारिक आंकड़ों को दोगुना करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संधि के बाद अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर (लगभग ₹1.6 लाख करोड़) का विदेशी निवेश आकर्षित होगा। समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजारों में 'ड्यूटी-फ्री' यानी शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा, जिससे निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

भारतीय पेशेवरों और फार्मा सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

यह समझौता न केवल व्यापार बल्कि रोजगार के मोर्चे पर भी भारतीय युवाओं के लिए अच्छी खबर लाया है। एफटीए के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए न्यूजीलैंड में अस्थायी रोजगार वीजा (Work Visa) की अवधि बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही, न्यूजीलैंड के बाजारों में भारतीय दवाओं और चिकित्सा उपकरणों (Medical Devices) के निर्यात की प्रक्रियाओं को भी बेहद सरल और सुगम बनाया जाएगा।

किसानों के हितों का रखा गया विशेष ध्यान

मोदी सरकार ने इस समझौते में स्थानीय किसानों और घरेलू कृषि उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे दुग्ध उत्पाद (Dairy), खाद्य तेल और सब्जियों को इस मुक्त व्यापार समझौते के दायरे से बाहर रखा है, ताकि न्यूजीलैंड के उत्पादों से स्थानीय किसानों को नुकसान न पहुंचे। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।