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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तराखंड के नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता में मंगलवार को 'इतिहास' रचा गया। दशकों से राजस्व गांव की मांग कर रहे हजारों लोगों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया और संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व जन सैलाब उमड़ पड़ा। जनता इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित इस महापंचायत में करीब 12 हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की, जिसे क्षेत्र के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।

तीन-तीन मुख्यमंत्रियों के आश्वासन पर अब भरोसा नहीं!

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सीधा प्रदेश की धामी सरकार और पिछली सरकारों पर निशाना साधा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिंदुखत्ता की जनता दशकों से वन भूमि के नाम पर मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है।

सरकारी वादाखिलाफी: वक्ताओं ने याद दिलाया कि प्रदेश के तीन-तीन मुख्यमंत्री पूर्व में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन आज तक इस पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ।

अधिकारों की लड़ाई: लोगों का आक्रोश इस बात पर था कि राजस्व गांव का दर्जा न मिलने के कारण वे अपने ही घर की जमीन पर मालिकाना हक और स्थायी सुविधाओं से वंचित हैं।

भारी पुलिस बल के साये में 'शांतिपूर्ण' लेकिन 'तीखा' प्रदर्शन

12 हजार लोगों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। एसपी सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट खुद मौके पर डटे रहे और भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा, लेकिन जनता का आक्रोश उनके नारों और वक्ताओं के तीखे संबोधनों में साफ सुनाई दे रहा था।

देहरादून से दिल्ली तक आंदोलन की चेतावनी

संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जुटे नेताओं ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता अब केवल आश्वासनों से मानने वाली नहीं है।

हल्द्वानी कूच: यदि जल्द मांग पूरी नहीं हुई, तो हजारों लोग हल्द्वानी की सड़कों पर उतरेंगे।

राजधानी घेराव: आंदोलन को देहरादून और देश की राजधानी दिल्ली तक ले जाने की चेतावनी दी गई है।

वोट की चोट: आगामी चुनाव के मद्देनजर भी जनता ने सरकार को अपनी ताकत का एहसास कराया है।

इन दिग्गजों ने बढ़ाया जनता का हौसला

इस विशाल सभा को कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल, हरीश पनेरू, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कैप्टन खिलाफ सिंह दानू और भाजपा नेता भरत नेगी समेत कई प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया। इसमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा, कांग्रेस और माले के नेताओं ने भी बिंदुखत्ता के हक की बात की।