Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत अब दुनिया का नया 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पावरहाउस' बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने 'एआई इम्पैक्ट समिट' के मंच से एक ऐसा ऐतिहासिक ऐलान किया है जो देश की तकनीकी तस्वीर को पूरी तरह बदल कर रख देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद पिचाई और डीपमाइंड के प्रमुख डेमिस हसाबिस ने घोषणा की है कि गूगल अगले पांच सालों में भारत के अंदर करीब 15 अरब डॉलर (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करेगा। यह पैसा देश के डिजिटल और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को आसमान की ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए खर्च किया जाएगा। आइए जानते हैं गूगल के इस मेगा प्लान से भारत के आम आदमी और स्टार्टअप्स को क्या फायदा होने वाला है।
विशाखापत्तनम में तैयार होगा देश का पहला और सबसे बड़ा AI हब
इस महा-निवेश का सबसे अहम हिस्सा आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनने जा रहा है। यहां गूगल देश का पहला और सबसे विशाल एआई डेटा सेंटर स्थापित करेगा। यह डेटा सेंटर सिर्फ ईंट-पत्थर की कोई आम इमारत नहीं होगा, बल्कि यह भारत के लिए 'डिजिटल दिमाग' की तरह काम करेगा। यहीं पर एडवांस एआई मॉडल्स की ट्रेनिंग होगी, क्लाउड सर्विसेस को मैनेज किया जाएगा और लार्ज स्केल कंप्यूटिंग का संचालन होगा। इस हब के तैयार होने से न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में एआई सेवाओं की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।
समंदर के नीचे बिछेगा इंटरनेट केबलों का जाल
हम सभी जानते हैं कि हाई-स्पीड इंटरनेट के बिना AI की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए गूगल ने भारत को दुनिया के बाकी हिस्सों से डायरेक्ट कनेक्ट करने के लिए समंदर के नीचे एक नई 'सबमरीन केबल' बिछाने का भी ब्लूप्रिंट तैयार किया है। यह केबल भारत को सीधे सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से जोड़ेगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब हमारे डेटा को अमेरिका या यूरोप का लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। डेटा का रास्ता छोटा होगा, जिससे इंटरनेट की स्पीड सुपरफास्ट हो जाएगी।
ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल और 10 करोड़ भारतीयों को AI ट्रेनिंग
गूगल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए एक क्लीन एनर्जी प्लांट भी लगा रहा है। यानी डेटा सेंटर्स को चलाने में ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल होगा, जिससे कार्बन फुटप्रिंट घटेगा। इसके अलावा, गूगल ने देश के 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को एआई की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है। इसका सीधा मतलब है कि AI की पहुंच अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी इस तकनीक में माहिर बनेंगे। सरकार के साथ मिलकर गूगल छात्रों के लिए एआई ट्यूटर, रियल-टाइम ट्रांसलेशन और ऑनलाइन फ्रॉड पकड़ने वाले टूल्स भी डेवलप कर रहा है।
भारतीय स्टार्टअप्स की होगी चांदी, लेकिन ये डेटा सेंटर क्या बला है?
इस कदम से भारतीय डेवलपर्स और स्टार्टअप्स को सबसे बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगी और विदेशी सर्वर सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना होगा। स्थानीय स्तर पर ही उन्हें सस्ती और हाई-कैपेसिटी कंप्यूटिंग पावर मिल जाएगी, जिससे नए-नए इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और लाखों रोजगार पैदा होंगे।
अगर आप सोच रहे हैं कि यह डेटा सेंटर आखिर होता क्या है, तो इसे आसान भाषा में समझिए। यह एक ऐसी बेहद सुरक्षित जगह होती है जहां लाखों सुपर-पावरफुल कंप्यूटर (सर्वर) एक साथ रखे होते हैं। जब आप फोन पर कोई ऐप चलाते हैं, वीडियो देखते हैं या AI से कोई सवाल पूछते हैं, तो आपका डेटा इन्हीं सर्वरों में जाता है और प्रोसेस होकर पलक झपकते ही आपके फोन पर रिजल्ट के रूप में वापस आ जाता है। इसे इंटरनेट और एआई की फैक्ट्री कहा जा सकता है।




