Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा होते ही ईरान की राजधानी तेहरान में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। 40 दिनों के भीषण संघर्ष और हमलों के डर के बीच मिली इस राहत को लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। एक तरफ जहां आम जनता शांति की उम्मीद में सड़कों पर जश्न मना रही है, वहीं दूसरी ओर कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने इस समझौते को 'अधूरा' बताकर अपना विरोध दर्ज कराया है।
तेहरान की सड़कों पर 'जीत' का जश्न
मंगलवार रात जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्धविराम का ऐलान हुआ, तेहरान के प्रमुख चौराहों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। स्थानीय नागरिक हाथों में ईरानी झंडे लेकर 'अल्लाह-हू-अकबर' के नारे लगा रहे थे। कई महीनों से जारी तनाव और इजरायली हमलों की आशंका के बीच, यह दो सप्ताह की मोहलत लोगों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाते और राहत की सांस लेते नजर आ रहे हैं।
विरोध प्रदर्शन: अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी
हालांकि, यह जश्न सर्वसम्मत नहीं है। 'एपी' की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा गुट सड़कों पर उतरा, जो इस युद्धविराम से खुश नहीं था। इन प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और विरोध स्वरूप उनके झंडे जलाए। उनका मानना है कि ईरान को तब तक नहीं रुकना चाहिए था जब तक क्षेत्र से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी नहीं हो जाती।
कूटनीतिक दावों में उलझा युद्धविराम
युद्धविराम की शर्तों को लेकर भी दोनों देशों के अपने-अपने दावे हैं:
ईरान का पक्ष: ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इसे तेहरान की "नैतिक और सामरिक जीत" करार दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका को ईरान की शर्तों के आगे झुकना पड़ा और हमलों को स्थगित करना पड़ा।
अमेरिका का पक्ष: इसके विपरीत, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिकी सैन्य शक्ति के दबाव ने ही ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने के लिए मजबूर किया है।
ऑस्ट्रेलिया ने किया स्वागत, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जताई चिंता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस शांति पहल का स्वागत शुरू हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज़ और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक संयुक्त बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा था। उन्होंने पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब जैसे मध्यस्थ देशों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संघर्ष का लंबा खिंचना वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय जीवन के लिए घातक साबित हो रहा था।




