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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान के कारण आज मोटापा एक वैश्विक महामारी बन चुका है। ऐसे में ओज़ेम्पिक (Ozempic) और वेगोवी (Wegovy) जैसी वजन घटाने वाली दवाओं की चर्चा हर तरफ है। भारत में इन दवाओं के पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने और जेनेरिक विकल्पों के आने से इनकी कीमतें भी कम हुई हैं, जिससे आम लोगों में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। लेकिन क्या सुई या गोली के जरिए वजन घटाना वाकई सेहतमंद है? विशेषज्ञों ने इन दवाओं के 'शॉर्टकट' को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।

कैसे काम करती हैं ये जादुई दवाएं?

ओज़ेम्पिक जैसी दवाओं को मूल रूप से टाइप-2 मधुमेह के इलाज के लिए बनाया गया था। ये दवाएं शरीर में जीएलपी-1 (GLP-1) नामक हार्मोन की नकल करती हैं। यह हार्मोन मस्तिष्क को संकेत देता है कि पेट भरा हुआ है, जिससे भूख कम लगती है और व्यक्ति कम कैलोरी का सेवन करता है। नतीजा यह होता है कि वजन तेजी से गिरने लगता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जो प्रक्रिया प्राकृतिक होनी चाहिए, उसे कृत्रिम रूप से नियंत्रित करना शरीर के लिए भारी पड़ सकता है।

डॉक्टर की सलाह के बिना सेवन: जानलेवा हो सकते हैं नतीजे

दवाओं का बिना डॉक्टरी परामर्श के सेवन करना 'आग से खेलने' जैसा है। उन्होंने इसके कुछ बेहद गंभीर दुष्प्रभावों (Side Effects) की ओर इशारा किया है:

अग्नाशयशोथ (Pancreatitis): अग्न्याशय में गंभीर सूजन, जो जानलेवा हो सकती है।

पित्ताशय की समस्याएं: गॉल ब्लैडर में पथरी या अन्य जटिलताएं।

रिबाउंड इफेक्ट: जैसे ही आप दवा छोड़ते हैं, वजन पहले से भी तेजी से वापस लौट आता है।

पाचन विकार: लगातार जी मिचलाना, उल्टी और गंभीर कब्ज की समस्या।

क्या जेनेरिक दवाएं सुरक्षित हैं?

नोवो नॉर्डिस्क द्वारा कीमतों में कटौती और भारतीय बाजार में सस्ते विकल्पों की उपलब्धता ने इसे सुलभ तो बना दिया है, लेकिन सुरक्षा के मानक वही हैं। जेनेरिक दवाएं सस्ती जरूर हैं, लेकिन वे शरीर के मेटाबॉलिज्म के साथ वैसा ही हस्तक्षेप करती हैं जैसा ब्रांडेड दवाएं। इसलिए, केवल कीमत कम होने के आधार पर इनका उपयोग शुरू कर देना जोखिम भरा हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय: दवा बैसाखी है, समाधान नहीं

वजन घटाने के लिए केवल दवाओं पर निर्भर रहना किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। दवाएं केवल एक 'बैसाखी' का काम कर सकती हैं, वह भी तब जब मोटापा किसी गंभीर बीमारी का कारण बन रहा हो। स्थाई परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली का कोई विकल्प नहीं है। बिना जीवनशैली बदले ली गई दवाएं केवल क्षणिक लाभ देती हैं और शरीर के आंतरिक अंगों को लंबे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकती हैं।