Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पटना के चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU) में आयोजित 'डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान' के दौरान सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक ढांचे को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी देश का संविधान केवल नागरिकों को दिए गए अधिकारों से महान नहीं बनता, बल्कि उसकी असली शक्ति उन संस्थाओं की निष्पक्षता और मजबूती में निहित है जो उन अधिकारों की रक्षा करती हैं।
स्वतंत्र संस्थाएं: लोकतंत्र की रीढ़
न्यायूमूर्ति नागरत्ना ने अपने संबोधन 'अधिकारों से परे संवैधानिकवाद: संरचना क्यों महत्वपूर्ण है' में इस बात पर जोर दिया कि कुछ विशिष्ट संस्थाओं का राजनीति से ऊपर और पूरी तरह स्वतंत्र रहना अनिवार्य है।
निर्वाचन आयोग (Election Commission): उन्होंने कहा कि यदि चुनाव कराने वाली संस्था ही चुनाव लड़ने वालों के अधीन होगी, तो निष्पक्ष चुनाव की कल्पना करना असंभव है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG): सरकारी खर्चों पर निगरानी रखने वाली इस संस्था की स्वायत्तता पारदर्शिता के लिए जरूरी है।
वित्त आयोग (Finance Commission): संसाधनों के उचित बंटवारे के लिए इसका स्वतंत्र होना संवैधानिक मर्यादा की मांग है।
संघीय ढांचा: राज्य केंद्र के 'अधीनस्थ' नहीं
केंद्र और राज्यों के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति नागरत्ना ने एक बड़ा संवैधानिक संदेश दिया। उन्होंने कहा:
"राज्य भारतीय संविधान की समन्वयक (Coordinating) इकाइयां हैं, वे केंद्र के अधीनस्थ (Subordinate) नहीं हैं। केंद्र सरकार को राज्यों के प्रति 'चुनिंदा दृष्टिकोण' (Selective Approach) अपनाने से बचना चाहिए।"
उन्होंने संघीय ढांचे (Federal Structure) की मजबूती को लोकतंत्र के लिए अनिवार्य बताया और कहा कि केंद्र और राज्यों को मिलकर एक टीम की तरह काम करना चाहिए।
नैतिक साहस और कानून का शासन
कार्यक्रम में मौजूद सर्वोच्च न्यायालय के एक अन्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि 'नैतिक साहस' संवैधानिक भावना का मुख्य तत्व है। शासन हमेशा विधि (Law) के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति की इच्छा पर।
न्यायालय और वकालत की साझी जिम्मेदारी
पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस व्याख्यान में हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि संवैधानिक संरचना की रक्षा करना केवल न्यायालयों का काम नहीं है, बल्कि यह वकीलों और कानून के छात्रों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। सीएनएलयू के कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा ने वैश्विक संदर्भ में चिंता जताते हुए कहा कि कई देशों में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है, ऐसे में संविधान को शक्तियों पर अंकुश लगाने का माध्यम बनाना होगा।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां
आयोजन स्थल: चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (CNLU), पटना।
मुख्य वक्ता: न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना (सुप्रीम कोर्ट)।
प्रमुख उपस्थिति: न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, महाधिवक्ता पीके शाही, और कई वरिष्ठ न्यायाधीश व शिक्षाविद।
संदेश: संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता ही लोकतंत्र की असली बुनियाद है।




