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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में समय बचाने के लिए बड़ी संख्या में लोग रात में आटा गूंथकर फ्रिज में रख देते हैं और सुबह उसी से रोटियां बनाते हैं। यह तरीका आसान और सुविधाजनक जरूर है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह आदत लंबे समय में पाचन तंत्र और ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर डाल सकती है। खासकर कामकाजी महिलाएं और व्यस्त परिवार इस तरीके को अपनाते हैं, मगर क्या यह सच में सुरक्षित है?

फ्रिज में भी पूरी तरह नहीं रुकती किण्वन प्रक्रिया

आमतौर पर माना जाता है कि फ्रिज की ठंडक में बैक्टीरिया निष्क्रिय हो जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो आटे में मौजूद प्राकृतिक खमीर की हल्की गतिविधि जारी रह सकती है। समय के साथ आटे में गैस और कार्बनिक अम्ल बनने लगते हैं। यही कारण है कि लंबे समय तक रखा आटा हल्का खट्टा स्वाद देने लगता है। इस रासायनिक बदलाव का असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है और आंतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की शिकायत

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आटा 24 घंटे या उससे अधिक समय तक फ्रिज में रखा जाए तो उसकी बनावट में बदलाव आ सकता है। ग्लूटेन कमजोर होने लगता है, जिससे बनी रोटी पचने में कठिन हो सकती है। परिणामस्वरूप गैस, पेट फूलना, भारीपन और एसिडिटी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। जिन लोगों का पाचन तंत्र पहले से संवेदनशील है, उनके लिए यह जोखिम और बढ़ जाता है।

ग्लूटेन में बदलाव और सुस्ती की समस्या

लंबे समय तक रखे आटे में खमीर की अधिकता ग्लूटेन संरचना को प्रभावित कर सकती है। इससे न केवल रोटी की गुणवत्ता बदलती है, बल्कि शरीर को उसे पचाने में अधिक समय लगता है। कई लोगों को ऐसी रोटी खाने के बाद सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है।

पोषण मूल्य में गिरावट

ताजा गूंथा आटा विटामिन और खनिजों से भरपूर होता है, लेकिन लंबे समय तक स्टोर करने से पोषक तत्वों में कमी आ सकती है। आयुर्वेद के अनुसार बासी भोजन शरीर को ऊर्जा देने के बजाय पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है। ऐसे में फ्रिज में कई घंटों या दिनों तक रखा आटा पोषण के लिहाज से उतना लाभकारी नहीं माना जाता।

मधुमेह रोगियों के लिए चेतावनी

डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए यह आदत अधिक सावधानी की मांग करती है। लंबे समय तक रखे आटे में मौजूद स्टार्च तेजी से टूट सकता है। ऐसी रोटी खाने पर ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ने की आशंका रहती है, जिसे मेडिकल भाषा में शुगर स्पाइक कहा जाता है। इसलिए मधुमेह मरीजों को ताजा आटे की रोटी को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।

क्या करें और क्या न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जितनी जरूरत हो उतना ही ताजा आटा गूंथें। अगर मजबूरी में स्टोर करना पड़े तो उसे एयरटाइट कंटेनर में रखें और 8 से 10 घंटे के भीतर उपयोग कर लें। आटे में खट्टापन, गंध या रंग में बदलाव दिखाई दे तो उसे इस्तेमाल न करें। ताजा और गरम भोजन पाचन के लिए अधिक अनुकूल माना जाता है और आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक होता है।

फ्रिज में रखा आटा भले ही समय बचाने का आसान उपाय लगे, लेकिन नियमित रूप से ऐसा करना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। छोटी सी सावधानी अपनाकर आप गैस, पाचन संबंधी गड़बड़ी और ब्लड शुगर असंतुलन जैसी समस्याओं से खुद को बचा सकते हैं।