Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आमतौर पर हम कोलेस्ट्रॉल को दिल का दुश्मन मानते हैं, लेकिन हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध ने इस धारणा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं सिर्फ आपके दिल की ही रक्षा नहीं करतीं, बल्कि इनका सीधा असर आपके मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है। आइए जानते हैं कि जिसे हम अब तक सिर्फ 'फैट' समझते थे, वह असल में हमारे शरीर के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभाता है।
क्या कोलेस्ट्रॉल हमेशा बुरा होता है? इसकी असलियत जानें
अक्सर लोग कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि यह हमारे रक्त में मौजूद एक अनिवार्य वसायुक्त पदार्थ है। यह कोशिकाओं की बाहरी दीवार बनाने, विटामिन-D के निर्माण और जरूरी हार्मोन्स के उत्पादन में मदद करता है। समस्या तब पैदा होती है जब खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ जाता है और यह रक्त वाहिकाओं में 'प्लाक' के रूप में जमा होने लगता है, जिसे 'एथेरोस्क्लेरोसिस' कहा जाता है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बनती है।
ब्रेन पावर और याददाश्त पर दवाओं का असर
शोधकर्ताओं ने पाया कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली कोलेस्ट्रॉल की दवा 'स्टैटिन' (Statin) लेने वाले मरीजों के मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' भाग में कुछ सकारात्मक बदलाव देखे गए। हिप्पोकैम्पस दिमाग का वह हिस्सा है जो सीखने और याद रखने (Learning & Memory) की क्षमता को नियंत्रित करता है। अध्ययन में पाया गया कि कुछ मामलों में यह हिस्सा पहले से बड़ा हो गया, जो यह संकेत देता है कि ये दवाएं मस्तिष्क की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अभी इस पर और अधिक शोध कर रहे हैं कि क्या यह बदलाव भविष्य में याददाश्त बढ़ाने का जरिया बन सकता है।
चौंकाने वाले साइड इफेक्ट्स: वजन और हार्मोन्स में बदलाव
जहाँ एक तरफ दवाओं के फायदे दिखे, वहीं शोध में कुछ सावधानियां भी बताई गई हैं। पाया गया कि स्टैटिन लेने वाले कुछ लोगों के शरीर में वसा (Body Fat) और वजन में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, पुरुषों में 'टेस्टोस्टेरोन' हार्मोन के स्तर में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो ऊर्जा और मांसपेशियों की मजबूती के लिए जिम्मेदार होता है। वहीं, 'PCSK9 इनहिबिटर' नामक आधुनिक दवाओं के अध्ययन में फेफड़ों की कार्यक्षमता में बदलाव के कुछ संकेत मिले हैं।
क्या कहती है वैज्ञानिकों की सलाह?
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दवाएं हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में बेहद प्रभावी हैं, लेकिन इनके व्यापक प्रभाव को देखते हुए इन्हें हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम सबसे सशक्त हथियार हैं।




