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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार सुबह बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार ने सुबह करीब 10:00 बजे परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना त्यागपत्र सौंपा। इस कदम के साथ ही बिहार में 'नीतीश युग' के अंत और नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी हलचल तेज है।

राज्यसभा जाने की तैयारी, MLC पद को कहा अलविदा

नीतीश कुमार के इस इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह उनका हालिया राज्यसभा चुनाव जीतना है। नियमानुसार, किसी भी सदन का सदस्य चुने जाने के 14 दिनों के भीतर पिछले सदन की सदस्यता छोड़नी अनिवार्य होती है। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद यह तय माना जा रहा था कि नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। सोमवार को दिया गया इस्तीफा उसी संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

30 अप्रैल तक दे सकते हैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बाद अब नीतीश कुमार के पास मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का तकनीकी आधार खत्म होता जा रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि वे 30 अप्रैल 2026 तक मुख्यमंत्री पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, अपनी हालिया 'समृद्धि यात्रा' के दौरान, जिसमें उन्होंने 32 जिलों का दौरा किया, नीतीश ने एक बार भी अपनी भावी योजनाओं या इस्तीफे का जिक्र नहीं किया था। उनके इस मौन ने सस्पेंस को और बढ़ा दिया है।

कौन होगा बिहार का अगला 'खेवनहार'?

नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर के साथ ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर नामों पर चर्चा शुरू हो गई है। जेडीयू (JDU) और गठबंधन के भीतर उत्तराधिकारी को लेकर मंथन जारी है। अटकलें हैं कि पार्टी किसी कद्दावर पिछड़ा या अति-पिछड़ा चेहरे पर दांव लगा सकती है या फिर किसी चौंकाने वाले नाम की घोषणा हो सकती है। फिलहाल, 13 अप्रैल के बाद की तारीख बिहार की राजनीति के लिए निर्णायक मानी जा रही है, जब सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

समृद्धि यात्रा से दिल्ली की राह तक का सफर

नीतीश कुमार की 26 मार्च को खत्म हुई 'समृद्धि यात्रा' को उनके विदाई दौरे के रूप में देखा जा रहा है। पहली बार उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद नीतीश अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं। उनके जाने के बाद बिहार की कमान किसके हाथ में होगी, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, जिसके बाद बिहार की नई सरकार की तस्वीर साफ होगी।