Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी 'समृद्धि यात्रा' का अंतिम चरण भले ही संपन्न हो गया हो, लेकिन यह यात्रा राज्य के विकास के लिए एक लंबी और सुनहरी लकीर छोड़ गई है। मात्र 24 दिनों के तूफानी दौरे में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के कोने-कोने को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 15,498 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने रिकॉर्ड 35 जनसभाओं को संबोधित किया, जिससे चुनावी माहौल से पहले राज्य में विकास की लहर तेज हो गई है।
पटना को मिला 1,056 करोड़ का तोहफा; राजधानी का होगा कायाकल्प
समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री का विशेष फोकस राजधानी पटना पर रहा। उन्होंने पटना जिले को कुल 1,056 करोड़ रुपये की 1,373 विकास योजनाओं की बड़ी सौगात दी। इनमें 583 करोड़ रुपये की 612 नई योजनाओं का शिलान्यास किया गया, जबकि 473 करोड़ रुपये की 761 पूर्ण हो चुकी योजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया गया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा को भी 810 करोड़ रुपये की 216 योजनाओं का लाभ मिला है, जो जिले के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेंगी।
उत्तर बिहार से सीमांचल तक योजनाओं की बरसात
यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर को 853 करोड़ और समस्तीपुर को 743 करोड़ रुपये की योजनाओं से नवाजा। सीमांचल और कोसी क्षेत्र में भी विकास की रफ़्तार तेज दिखी:
अररिया और किशनगंज: कुल 781 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स।
सहरसा और सुपौल: करीब 1,082 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाएं।
सारण और सिवान: 740 करोड़ रुपये की 140 परियोजनाओं को हरी झंडी।
मुंगेर और गया: मगध और मुंगेर प्रमंडल में भी 1,500 करोड़ से अधिक का निवेश सुनिश्चित किया गया।
जमुई और बांका में रिकॉर्ड शिलान्यास; दक्षिण बिहार भी नहीं रहा पीछे
समृद्धि यात्रा के अंतिम चरण में दक्षिण बिहार के जिलों में भी विकास का पहिया तेजी से घूमा। जमुई जिले को सबसे बड़ी राशि यानी 914 करोड़ रुपये की 370 योजनाओं की सौगात मिली। वहीं, बांका में 709 करोड़ और गया में 744 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन-शिलान्यास हुआ। यात्रा के आखिरी दिनों में मुख्यमंत्री ने शाहाबाद क्षेत्र के बक्सर, भोजपुर, रोहतास और कैमूर जिलों में भी करीब 1,750 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की।
विकास के साथ जन-संवाद: 'समृद्धि' से बढ़ेगा बिहार का मान
पटना के बापू सभागार में आयोजित समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य बिहार के हर गांव तक बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि कार्यारंभ की गई सभी योजनाओं को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा किया जाए। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के जरिए नीतीश कुमार ने न केवल अपना 'विकास पुरुष' का कार्ड दोबारा खेला है, बल्कि विपक्ष के सामने विकास की एक ऐसी चुनौती पेश कर दी है जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।




