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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए योगी सरकार ने खुशियों का पिटारा खोल दिया है। गेंहू और धान की पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब यूपी का किसान रेशम के जरिए अपनी तकदीर बदलेगा। प्रदेश सरकार ने 'मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना' के तहत एक दूरगामी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके जरिए वर्ष 2034-35 तक राज्य में 360 टन अतिरिक्त रेशम धागे का उत्पादन किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के केंद्र में तराई और पूर्वांचल के 11 जिले हैं, जहां रेशम उद्योग को 'फार्म टू फैब्रिक' मॉडल पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

तराई और पूर्वांचल के इन 11 जिलों में मचेगी धूम; 13,500 किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

सरकार ने रेशम उत्पादन के लिए उत्तर प्रदेश के उन जिलों को चुना है जहाँ की जलवायु शहतूत (मल्बरी) की खेती के लिए अनुकूल है। इस योजना के दायरे में बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, गोंडा, बलरामपुर, कुशीनगर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बिजनौर और सहारनपुर को शामिल किया गया है। विभाग का लक्ष्य है कि इन जिलों के लगभग 13,500 किसानों को इस योजना से जोड़कर उनकी 9,000 एकड़ भूमि पर शहतूत का पौधारोपण कराया जाए। बता दें कि शहतूत की पत्तियां ही रेशम के कीटों का मुख्य आहार होती हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला रेशम तैयार होता है।

75% सब्सिडी और ट्रेनिंग: खेती से लेकर उपकरण तक सरकार देगी साथ

किसानों को इस क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने भारी-भरकम अनुदान (Subsidy) की व्यवस्था की है। रेशम विभाग के अनुसार, शहतूत रोपण, कीटपालन गृह (रीयरिंग हाउस) के निर्माण और आवश्यक उपकरणों की खरीद पर किसानों को 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। योजना के नोडल अधिकारी नीरेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक 1,500 किसानों को आधुनिक तकनीक और रोग नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार का उद्देश्य कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों पर निर्भरता कम कर यूपी को रेशम के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।

27 टन से 515 टन तक का सफर: रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहा है उत्पादन

उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन की रफ्तार पिछले कुछ वर्षों में चौंकाने वाली रही है। कुछ साल पहले तक जहां राज्य में मात्र 27 टन रेशम पैदा होता था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 480 टन तक पहुंच गया है। सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए 515 टन का लक्ष्य रखा है।

रेशम उत्पादन के आगामी लक्ष्य (वर्ष 2026-27):

रेशम का प्रकारउत्पादन लक्ष्य
शहतूत (मल्बरी) रेशम414 टन
टसर रेशम31 टन
ऐरी रेशम70 टन
कुल संभावित उत्पादन515 टन

बुनकरों के लिए भी खुलेगा बाजार, 'फार्म टू फैब्रिक' पर जोर

सरकार केवल धागा बनाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरी 'वैल्यू चेन' को मजबूत कर रही है। 'फार्म टू फैब्रिक' मॉडल के तहत रेशम उत्पादक किसानों को सीधे बुनकरों और बड़े बाजारों से जोड़ा जाएगा ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतरीन मूल्य मिल सके। इससे न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।