img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय रेलवे अपने यात्रियों के सफर को और अधिक सुविधाजनक और लचीला बनाने के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। अब उन यात्रियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है जिन्हें आखिरी वक्त में अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलना पड़ता है। नए नियमों के मुताबिक, आगामी अप्रैल महीने से यात्री ट्रेन का चार्ट तैयार होने के बाद भी अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा टिकटिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाने और डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

30 मिनट पहले तक का मौका: मोबाइल ऐप से होगा सारा काम

अभी तक के नियमों के अनुसार, बोर्डिंग स्टेशन बदलने के लिए यात्रियों को काफी पहले आवेदन करना पड़ता था, लेकिन नए प्रावधान के तहत अब ट्रेन छूटने से मात्र 30 मिनट पहले तक यह बदलाव संभव होगा। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को इसके लिए किसी स्टेशन मास्टर या काउंटर के चक्कर नहीं काटने होंगे; वे अपने मोबाइल ऐप के जरिए ही डिजिटल तरीके से अपना बोर्डिंग स्टेशन अपडेट कर सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो अचानक किसी निजी कारण या ट्रैफिक की वजह से तय स्टेशन की जगह दूसरे नजदीकी स्टेशन से ट्रेन पकड़ना चाहते हैं।

रिफंड और कैंसिलेशन की प्रक्रिया हुई आसान; TDR का झंझट खत्म

रेलवे ने केवल बोर्डिंग ही नहीं, बल्कि टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों में भी बड़ी ढील दी है। नए सिस्टम के तहत:

कहीं भी कैंसिलेशन: अब काउंटर से खरीदे गए 'पीआरएस' टिकटों को किसी भी नजदीकी रेलवे स्टेशन से रद्द कराया जा सकेगा।

ऑटो-रिफंड: ई-टिकट धारकों के लिए अब टीडीआर (Ticket Deposit Receipt) भरने की अनिवार्यता को समाप्त करने की योजना है। चार्ट बनने के बाद भी अगर टिकट कन्फर्म नहीं होता या ट्रेन रद्द होती है, तो रिफंड की राशि स्वतः यात्रियों के मूल बैंक खाते में वापस आ जाएगी।

डिजिटल टिकटिंग: पूरी प्रक्रिया को पेपरलेस और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि बिचौलियों और कतारों से मुक्ति मिल सके।

अप्रैल से लागू होने की संभावना; सीटीआई ने दी जानकारी

भागलपुर के मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) फूल कुमार शर्मा के अनुसार, रेलवे मंत्रालय इन बदलावों को अंतिम रूप दे रहा है। हालांकि आधिकारिक अधिसूचना के पूर्ण विवरण का इंतजार है, लेकिन पूरी संभावना है कि 1 अप्रैल 2026 से ये नियम धरातल पर उतर आएंगे। इस बदलाव को रेलवे के डिजिटल सुधारों की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। रेलवे का लक्ष्य है कि चार्ट बनने के बाद खाली रहने वाली सीटों का बेहतर प्रबंधन हो सके और यात्रियों को अंतिम समय तक कंफर्म सीट मिलने की संभावना बनी रहे।