Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब में इस बार दीवाली पर पराली जलाने की मात्रा काफी कम रही, लेकिन पटाखों के धुएं ने हवा को बेहद जहरीला बना दिया। अमृतसर और जालंधर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 500 तक पहुंच गया, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया।
राज्य में मंगलवार को भी कुछ जगहों पर दीवाली और बंदी छोड़ दिवस मनाया जाएगा। ऐसे में आतिशबाजी से हवा की गुणवत्ता और बिगड़ सकती है। हालांकि, सोमवार को दीवाली की आड़ में पराली जलाने के मामले कम रहे—केवल 45 केस सामने आए, जो पिछले साल की तुलना में 90% कम हैं।
वर्ष 2024 में 31 अक्टूबर को दीवाली के दिन पराली जलाने के 484 मामले दर्ज किए गए थे। इस साल अब तक राज्य में 353 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा केस तरनतारन में (125) और अमृतसर में (112) दर्ज हुए हैं।
एक दिन पहले रविवार को पराली जलाने के 67 मामले सामने आए थे, लेकिन तब सभी शहरों में AQI 200 के नीचे था। लेकिन सोमवार रात दीवाली पर पटाखों के धुएं ने AQI को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया। पटियाला और लुधियाना में भी AQI 400 के पार दर्ज हुआ। ऐसे समय में खुले में सांस लेना बेहद खतरनाक माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक हुआ। दीवाली पर देर रात तक पटाखों की आवाजाही और धुआं AQI को 500 के खतरनाक स्तर तक ले गया।
इस बार पराली कम जलने का एक बड़ा कारण बाढ़ भी रही। माझा इलाके में बाढ़ के कारण फसल बड़ी मात्रा में तबाह हो गई। सीजन की शुरुआत में यही क्षेत्र फसल कटाई के लिए अग्रणी होता है। फसल नुकसान के कारण पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। वहीं, मालवा क्षेत्र में फसल कटाई शुरू होने के साथ अगले दिनों में पराली जलाने के मामलों में वृद्धि की संभावना है।
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