Prabhat Vaibhav,Digital Desk : जब समंदर की लहरों पर INS विक्रांत सीना ताने चलता है या आसमान में तेजस गर्जना करता है, तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन युद्धपोतों, मिसाइलों और टैंकों के ये दमदार नाम कौन रखता है? यह कोई रैंडम प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे रक्षा मंत्रालय के कड़े नियम, इतिहास के पन्ने और गहरी सैन्य परंपराएं छिपी हैं। आइए जानते हैं भारतीय सेना के 'नामकरण संस्कार' का पूरा विज्ञान।
कौन लेता है अंतिम फैसला? रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रपति की भूमिका
भारतीय सशस्त्र बलों के हथियारों और जहाजों के नामकरण का औपचारिक प्रबंधन रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इसमें तीनों सेनाओं (थल, नभ और जल) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। प्रक्रिया इतनी सख्त है कि नामों को चुनने के बाद उन्हें संबंधित सेना प्रमुख से अनुमोदित कराना पड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि किसी भी युद्धपोत के आदर्श वाक्य (Motto) और उसके ध्वज को अंतिम मंजूरी स्वयं भारत के राष्ट्रपति देते हैं।
नौसेना की 'आंतरिक नामकरण समिति': इतिहास और संस्कृति का संगम
भारतीय नौसेना में नामों के चयन के लिए एक विशेष 'आंतरिक नामकरण समिति' होती है। इस समिति का नेतृत्व नौसेना के सहायक कर्मचारी करते हैं और इसमें इतिहासकार, पुरातत्वविद और परिवहन विशेषज्ञ शामिल होते हैं। इनका काम यह सुनिश्चित करना है कि जहाज का नाम भारत की समृद्ध विरासत और रणनीतिक पहचान को झलकाता हो।
किस जहाज को क्या नाम मिलेगा? यह है 'कोडिंग' सिस्टम
नौसेना में जहाजों के प्रकार के आधार पर नामकरण की एक निश्चित पद्धति (Nomenclature) अपनाई जाती है:
विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers): इनके नाम अक्सर 'V' अक्षर से शुरू होते हैं, जैसे INS विक्रांत या विक्रमादित्य।
विध्वंसक (Destroyers): इनका नाम आमतौर पर देश के प्रमुख शहरों के नाम पर रखा जाता है (जैसे INS दिल्ली, INS मुंबई)।
फ्रिगेट (Frigates): इनके नाम नदियों, पहाड़ों या घातक हथियारों के नाम पर होते हैं।
पनडुब्बियां (Submarines): इनका नाम समुद्री जीवों या पौराणिक पात्रों के नाम पर रखा जाता है।
वायुसेना और मिसाइलें: संस्कृत और दर्शन का प्रभाव
भारतीय वायु सेना और मिसाइल प्रणालियों के नामों में अक्सर संस्कृत भाषा और भारतीय दर्शन की झलक मिलती है। उदाहरण के लिए, 'तेजस' नाम गतिशीलता और ओज का प्रतीक है। वहीं, मिसाइलों के नाम (जैसे अग्नि, पृथ्वी, आकाश) प्राकृतिक तत्वों और प्राचीन पौराणिक कथाओं से प्रेरित हैं, जो उनकी मारक क्षमता और प्रकृति को दर्शाते हैं।
टैंकों के नाम में झलकता है 'शौर्य'
थल सेना के हथियारों, विशेषकर टैंकों के नामकरण में वीरता को प्राथमिकता दी जाती है। 'अर्जुन' टैंक का नाम महाभारत के महान धनुर्धर के नाम पर रखा गया है, जो युद्ध के मैदान में अचूकता, अदम्य शक्ति और साहस का प्रतीक है। इसी तरह 'भीष्म' टैंक भी अपनी अजेय शक्ति के लिए जाना जाता है।




