Prabhat Vaibhav,Digital Desk : शहर की ऐतिहासिक पहचान और बलिदानों का प्रतीक 'घंटाघर' अब एक नए और भव्य कलेवर में नजर आने लगा है। वर्षों की खामोशी के बाद एक बार फिर इसकी घंटी की गूंज शहर की आबोहवा में सुनाई देने लगी है। नगर निगम द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से किए गए सुंदरीकरण के बाद यह ऐतिहासिक धरोहर पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई है।
पुरानी यादें और नई तकनीक: गूंजने लगी घड़ी की घंटी
घंटाघर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल घड़ी रही है, जो लंबे समय से बंद पड़ी थी। नगर निगम ने सुंदरीकरण प्रोजेक्ट के तहत पुरानी घड़ी के स्थान पर आधुनिक डिजिटल घड़ी स्थापित की है। अब हर घंटे बजने वाली घंटी की आवाज आसपास के इलाकों में गूंज रही है, जो बुजुर्गों को पुराने दौर की याद दिला रही है। स्थानीय दुकानदार कृष्णनंदन चौरसिया बताते हैं कि घड़ी की आवाज से समय का आभास होता रहता है और इसके दोबारा शुरू होने से एक भावनात्मक कमी पूरी हो गई है।
फसाड लाइटों से रात में जगमग होगी विरासत
घंटाघर की सुंदरता को और अधिक निखारने के लिए नगर निगम इसे रंग-बिरंगी फसाड लाइटों (Facade Lights) से लैस करने जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रोशनी में नहाया हुआ घंटाघर रात के समय न केवल शहरवासियों बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक बेहतरीन 'लैंडमार्क' साबित होगा। सुंदरीकरण कार्य के अंतर्गत:
ढांचे की मरम्मत: ऐतिहासिक मीनार की मजबूती और दरारों को ठीक किया गया है।
रंग-रोगन: पारंपरिक वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए नया पेंट और पॉलिश किया गया है।
आधुनिक लाइटिंग: रात के समय भव्यता बढ़ाने के लिए विशेष लाइटिंग व्यवस्था।
पर्यटन और सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता
अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा के अनुसार, इस पुनर्जीवन का उद्देश्य शहर की ऐतिहासिक गरिमा को सहेजना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। घंटाघर अब शहर के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है। शाम के समय बड़ी संख्या में लोग यहाँ समय बिताने और तस्वीरें खिंचवाने पहुँच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी नए अवतार वाले घंटाघर की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता में चार चांद लग गए हैं।




