Prabhat Vaibhav,Digital Desk : कैंसर अनुसंधान की दुनिया में एक ऐसी क्रांतिकारी खोज हुई है, जो स्तन कैंसर (Breast Cancer) के इलाज की दिशा बदल सकती है। लंबे समय से डॉक्टर इस बात से हैरान थे कि स्तन कैंसर की कोशिकाएं शरीर के अन्य अंगों की तुलना में फेफड़ों (Lungs) को इतनी जल्दी अपना निशाना क्यों बनाती हैं। कोलोराडो विश्वविद्यालय के कैंसर केंद्र के हालिया शोध ने इस 'सहायक तंत्र' का पर्दाफाश कर दिया है। अध्ययन के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं फेफड़ों की अपनी सुरक्षा प्रणाली को ही अपना हथियार बना लेती हैं, जिससे वहां ट्यूमर का फैलना आसान हो जाता है।
फेफड़ों की 'मरम्मत प्रणाली' का घातक इस्तेमाल
कैंसर रिसर्च कम्युनिटी में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, फेफड़ों में खुद को ठीक करने की एक अद्भुत प्राकृतिक क्षमता होती है। जब फेफड़ों की वायु थैलियां (Alveoli) क्षतिग्रस्त होती हैं, तो शरीर तुरंत मरम्मत प्रक्रिया शुरू कर देता है। स्तन कैंसर की कोशिकाएं इसी 'रिपेयर सिस्टम' का फायदा उठाती हैं। जैसे ही ये कोशिकाएं फेफड़ों तक पहुंचती हैं, वे मरम्मत की इस प्रक्रिया को कभी न खत्म होने वाले चक्र में बदल देती हैं। इससे फेफड़ों में लगातार सूजन (Inflammation) बनी रहती है, जो कैंसर के बढ़ने के लिए एक आदर्श वातावरण तैयार कर देती है।
एल्वियोलर टाइप-2 कोशिकाएं: दोस्त या दुश्मन?
शोध में पाया गया कि फेफड़ों की एल्वियोलर टाइप-2 (AT2) कोशिकाएं, जो आमतौर पर फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं, कैंसर की मौजूदगी में 'गद्दार' की तरह व्यवहार करने लगती हैं। ये कोशिकाएं ऐसे रासायनिक संकेत (Signals) छोड़ती हैं, जो ट्यूमर के विकास को खाद-पानी देने का काम करते हैं। कैंसर कोशिकाएं इन संकेतों के साथ तालमेल बिठा लेती हैं और फेफड़ों के भीतर अपना साम्राज्य फैला लेती हैं। यही कारण है कि फेफड़ों तक पहुंचने के बाद स्तन कैंसर का इलाज और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
रोफ्लुमिलास्ट (Roflumilast): क्या यह दवा बनेगी गेम-चेंजर?
इस घातक चक्र को तोड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अनोखा प्रयोग किया है। उन्होंने रोफ्लुमिलास्ट नामक दवा का परीक्षण किया, जिसका उपयोग वर्तमान में फेफड़ों की बीमारी (COPD) के इलाज में किया जाता है। प्रयोगों के दौरान देखा गया कि यह दवा कैंसर के अनुकूल उस 'मददगार वातावरण' को बदल देती है, जिससे ट्यूमर की वृद्धि धीमी हो जाती है।
विशेषज्ञों का मत: यह दृष्टिकोण पारंपरिक कीमोथेरेपी से अलग है। जहां कीमो सीधे कैंसर कोशिकाओं को मारती है, वहीं यह दवा उस 'सपोर्ट सिस्टम' को ही खत्म कर देती है जिसके दम पर कैंसर पनपता है।
भविष्य की राह: अभी और परीक्षण बाकी
हालांकि यह शोध कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी जीत मानी जा रही है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी प्रारंभिक चरण में है। मनुष्यों पर इसके व्यापक इस्तेमाल से पहले अभी कई और क्लीनिकल ट्रायल की आवश्यकता है। भारत और दुनिया भर में महिलाओं में स्तन कैंसर मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, ऐसे में यह खोज उन लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके शरीर में कैंसर फैलने (Metastasis) का खतरा बना रहता है।




