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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त एक ऐसी खबर आ रही है जिसने पूरी दुनिया की सांसें रोक दी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रहा तनाव अब सीधे सैन्य टकराव में बदलता दिख रहा है। जिनेवा में शांति वार्ता के बुरी तरह विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े सैन्य कदम उठाने के संकेत दिए हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने अपने सबसे घातक स्टील्थ लड़ाकू विमानों से ईरान की सीमाओं को चारों तरफ से घेर लिया है, जिसके जवाब में ईरान ने पूरे देश में 'नॉटैम' (NOTAM) जारी कर हवाई क्षेत्र को सील कर दिया है।

तेहरान पर मंडराया खतरा: ईरान ने क्यों जारी किया 'नॉटैम'?

अमेरिकी हमले की बढ़ती आशंका के बीच ईरान सरकार ने आनन-फानन में पूरे देश को 'नो-फ्लाई ज़ोन' घोषित कर दिया है। तकनीकी भाषा में इसे 'NOTAM' (Notice to Airmen) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि अब ईरान के आसमान में किसी भी वाणिज्यिक या निजी विमान के उड़ने पर पाबंदी होगी। हालांकि, आधिकारिक तौर पर ईरान का कहना है कि यह कदम 'रॉकेट परीक्षण' के लिए उठाया गया है, लेकिन वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अमेरिका के संभावित हवाई हमलों के खिलाफ अपनी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को सक्रिय करने की एक युद्धकालीन तैयारी है।

रडार को चकमा देने वाले F-22 और F-35 तैनात, नौसेना ने भी संभाला मोर्चा

वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने तेहरान को दहलाने के लिए अपने 'अदृश्य' लड़ाकू विमानों F-22 और F-35 का बेड़ा ईरानी सीमाओं के पास रणनीतिक अड्डों पर तैनात कर दिया है। ये विमान रडार की नजरों से बचकर सीधे दुश्मन के ठिकानों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक करने के लिए मशहूर हैं। सिर्फ आसमान ही नहीं, समुद्र में भी हलचल तेज है। अमेरिकी नौसेना के दो विशालकाय विमानवाहक पोत—यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड—ईरानी जलक्षेत्र के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। यह घेराबंदी इशारा कर रही है कि हमला किसी भी वक्त शुरू हो सकता है।

जिनेवा वार्ता विफल: जेडी वैंस ने दी 'सब्र टूटने' की चेतावनी

17 फरवरी को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में परमाणु समझौते को लेकर हुई दूसरे दौर की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस ने एक इंटरव्यू में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान, राष्ट्रपति ट्रंप की शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है, और अब अमेरिका का धैर्य जवाब दे रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि कूटनीति के रास्ते बंद हो चुके हैं और अब केवल सैन्य दबाव ही ईरान को बातचीत की मेज पर ला सकता है या उसके परमाणु ठिकानों को तबाह कर सकता है।

खामेनेई की ललकार: 'डरेंगे नहीं, देंगे भयावह जवाब'

दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध की पहल तो नहीं करेगा, लेकिन अगर उसकी संप्रभुता पर हमला हुआ, तो जवाब इतना भयावह होगा कि अमेरिका ने कभी सोचा भी नहीं होगा। खामेनेई ने कहा कि ईरानी सेना और लोग किसी भी खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बयान के बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध के बादल घने हो गए हैं और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।