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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पृथ्वी की घूर्णन गति धीमी हो रही है क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि हमारी घड़ी में 24 घंटे के बजाय 25 घंटे हों? यह विज्ञान कथाओं की कहानियों जैसा नहीं है, लेकिन पृथ्वी विज्ञान के शोध इसी ओर इशारा कर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूर्णन गति धीमी हो रही है। यह परिवर्तन बहुत सूक्ष्म है, लेकिन लंबे समय में यह समय की परिभाषा को बदल सकता है। इसके लिए मुख्य रूप से चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण और पृथ्वी के बदलते वायुमंडल जिम्मेदार हैं।

पृथ्वी के घूर्णन की गति में कमी

हम आम तौर पर मानते हैं कि पृथ्वी पर एक दिन ठीक 24 घंटे का होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में सौर दिवस कहा जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि पृथ्वी की गति स्थिर नहीं है। शोध से पता चलता है कि पृथ्वी का घूर्णन प्रत्येक शताब्दी में कुछ मिलीसेकंड धीमा हो रहा है। यह प्रक्रिया रातोंरात नहीं होती, बल्कि लाखों वर्षों से चल रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इस धीमी गति के कारण, दिन की लंबाई धीरे-धीरे बढ़ रही है।

चंद्रमा की भूमिका और ज्वार-भाटे का प्रभाव

पृथ्वी की गति धीमी होने का सबसे बड़ा कारण हमारा उपग्रह चंद्रमा है। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी के महासागरों में ज्वार-भाटे आते हैं। इन ज्वार-भाटों और पृथ्वी की सतह के बीच घर्षण उत्पन्न होता है, जो पृथ्वी की घूर्णन गति पर एक प्राकृतिक 'ब्रेक' का काम करता है। इस प्रक्रिया के कारण पृथ्वी की ऊर्जा कम हो रही है और चंद्रमा हर साल पृथ्वी से लगभग 3.8 सेंटीमीटर दूर जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप दिन लंबे होते जा रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ा कारण है।

इसके लिए न केवल खगोलीय घटनाएँ, बल्कि पृथ्वी पर मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार हैं। नासा की रिपोर्टों के अनुसार, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में बर्फ पिघलने के कारण समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। इसके अलावा, भूजल के अत्यधिक खिंचाव के कारण पृथ्वी के द्रव्यमान का वितरण भी बदल रहा है। जब पृथ्वी के ध्रुवों से बर्फ पिघलती है और पानी भूमध्य रेखा की ओर बढ़ता है, तो पृथ्वी की गति में थोड़ी कमी आती है और दिन की लंबाई बढ़ जाती है।

25 घंटे का कार्यदिवस कब संभव हो पाएगा?

इन सभी कारणों से दिन लंबा होता जा रहा है, लेकिन 25 घंटे का दिन देखने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। मौजूदा अनुमानों के अनुसार, पृथ्वी के घूर्णन में इतना बड़ा बदलाव होने में लगभग 20 करोड़ वर्ष लग सकते हैं। यानी, यह घटना हमारे जीवनकाल में नहीं होगी, लेकिन भविष्यवाणियों के अनुसार, यह पृथ्वी के इतिहास में एक बड़ी खगोलीय घटना होगी। वैज्ञानिक आधुनिक परमाणु घड़ियों और उपग्रह डेटा के माध्यम से इन परिवर्तनों पर लगातार नज़र रख रहे हैं।