Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के विस्तार को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। हाईकोर्ट की ऐतिहासिक इमारत के समग्र विकास और विस्तार से जुड़ा प्रस्ताव अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया में पहुंच गया है। चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार ने इसे इंटरनेशनल मैनेजमेंट प्लान में शामिल कर आगे यूनेस्को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
20.50 लाख वर्ग फुट अतिरिक्त निर्माण का प्रस्ताव
योजना के तहत हाईकोर्ट परिसर में करीब 20.50 लाख वर्ग फुट अतिरिक्त निर्माण प्रस्तावित है। यह विस्तार न केवल कोर्टरूम की संख्या बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि स्टाफ और वकीलों को भी बेहतर कार्यस्थल उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हेरिटेज कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
मामला जब मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आया, तो यूटी प्रशासन ने जानकारी दी कि 20 जनवरी को चंडीगढ़ हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की बैठक हुई थी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हाईकोर्ट के समग्र विकास की योजना को फाउंडेशन ले कार्बुजिए, पेरिस और भारत सरकार को भेजा जाए। प्रशासन ने बताया कि यह प्रस्ताव अब केंद्र सरकार और संबंधित फाउंडेशन को भेज दिया गया है।
संस्कृति मंत्रालय पहुंचा प्रस्ताव, यूनेस्को को भेजने की तैयारी
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने अदालत को बताया कि यूटी प्रशासन का पत्र बुधवार सुबह ही केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को प्राप्त हो गया है। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह प्रस्ताव यूनेस्को समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भेजा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
अगली सुनवाई शुक्रवार को, कोर्ट रखेगा नजर
अदालत ने सभी बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी। सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि अब तक दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ है।
विश्व धरोहर होने के कारण जरूरी है अंतरराष्ट्रीय मंजूरी
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की मूल इमारत विश्वप्रसिद्ध वास्तुकार ले कार्बुजिए द्वारा डिजाइन की गई है। यह चंडीगढ़ के कैपिटल कॉम्प्लेक्स का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया है। इसी वजह से किसी भी तरह के विस्तार या बदलाव के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों और यूनेस्को के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है।
लंबे समय से जूझ रहा है हाईकोर्ट जगह की कमी से
हाईकोर्ट लंबे समय से स्थान और बुनियादी ढांचे की कमी की समस्या उठा रहा है। स्वीकृत 85 जजों के मुकाबले फिलहाल केवल 69 कोर्टरूम ही उपलब्ध हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। पहले के आदेशों में अदालत यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि कई कर्मचारी तंग और ठीक से हवादार न होने वाले कमरों में काम करने को मजबूर हैं और जगह की कमी के कारण फाइलें तक फर्श पर रखनी पड़ती हैं।



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