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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय रेलवे की प्रीमियम ट्रेन 'वंदे भारत एक्सप्रेस' पर पथराव की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अब 'मिशन मोड' में हाईटेक तकनीक का सहारा लिया है। रायबरेली में आरपीएफ ने पत्थरबाजों और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों को मैदान में उतार दिया है। जिले के दो प्रमुख आरपीएफ पोस्ट को ये विशेष ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो ट्रेन के गुजरने से पहले ट्रैक और आसपास के इलाकों की आसमान से निगरानी करेंगे।

4 किलोमीटर के दायरे में संदिग्ध गतिविधियों पर होगी पैनी नजर

आरपीएफ द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ये आधुनिक ड्रोन करीब 4 किलोमीटर की परिधि (रेंज) में हाई-रेजोल्यूशन निगरानी करने में सक्षम हैं। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी निरीक्षक एस.के. सिंह यादव के मुताबिक, इन ड्रोन्स का मुख्य उपयोग उन संवेदनशील इलाकों में किया जाएगा, जहां पहले भी पत्थरबाजी की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं। वंदे भारत के आने से पहले ही ड्रोन उड़ाकर पटरियों के किनारे छिपे संदिग्धों या किसी भी अप्रिय गतिविधि का जायजा लिया जाएगा।

फोटो और वीडियो साक्ष्य से होगी आरोपियों की पहचान

अक्सर पत्थरबाजी की घटनाओं के बाद आरोपी भागने में सफल हो जाते थे, लेकिन अब ड्रोन कैमरों के जरिए उनकी तस्वीरें और वीडियो रीयल-टाइम में रिकॉर्ड किए जा सकेंगे। यह डेटा न केवल आरोपियों की पहचान करने में मदद करेगा, बल्कि कोर्ट में ठोस सबूत के तौर पर भी काम आएगा। हाल ही में एक पत्थरबाज को रेलवे मजिस्ट्रेट द्वारा एक साल की सजा और जुर्माना सुनाए जाने के बाद, आरपीएफ अब इस डिजिटल निगरानी से सुरक्षा चक्र को और मजबूत कर रही है।

स्थानीय लोगों को जागरूक करने का भी अभियान जारी

तकनीक के साथ-साथ आरपीएफ मानवीय स्तर पर भी प्रयास कर रही है। संवेदनशील क्षेत्रों के पास रहने वाले ग्रामीणों और युवाओं को जागरूक किया जा रहा है कि ट्रेन पर पत्थर फेंकना न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह यात्रियों की जान के लिए भी बड़ा खतरा है। आरपीएफ का मानना है कि ड्रोन की तैनाती से यात्रियों में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा और असामाजिक तत्वों के मन में कानून का डर पैदा होगा।