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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब के मोगा में शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान की रैली के दौरान जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अड़े किसान बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री का घेराव करने पहुंचे, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई करते हुए कई किसान नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

श्मशान घाट में 4 घंटे तक नजरबंद रहे किसान

मिली जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसान सबसे पहले दुनेके गांव के एक गुरुद्वारे के पास एकत्रित हुए थे। यहां से वे रैली स्थल की ओर कूच करने की तैयारी में थे, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने किसानों को पास के ही एक श्मशान घाट में करीब चार घंटे तक नजरबंद रखा। पुलिस की इस कार्रवाई से किसानों में भारी रोष देखने को मिला और उन्होंने वहीं बैठकर सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।

पुलिस को चकमा देकर अनाज मंडी पहुंचे प्रदर्शनकारी

कड़ी सुरक्षा के बावजूद, कुछ किसान पुलिस की घेराबंदी तोड़कर नई अनाज मंडी स्थित रैली स्थल तक पहुंचने में कामयाब रहे। जैसे ही ये किसान सभा स्थल के पास पहुंचे और नारेबाजी शुरू की, पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों को जबरन पुलिस की गाड़ियों में बिठाकर थाने ले जाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच काफी धक्का-मुक्की भी हुई।

इन सवालों पर सीएम से जवाब चाहते थे किसान

किसान नेताओं का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से सीधे संवाद कर कुछ ज्वलंत मुद्दों पर जवाब मांगना चाहते थे। किसानों के मुख्य मुद्दे इस प्रकार हैं:

पंजाब में लगातार बढ़ते नशे के मामले और युवाओं की मौत।

कथित फर्जी एनकाउंटर की घटनाओं पर स्पष्टीकरण।

खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाए जाने की कार्रवाई का विरोध।

ट्रैक्टर-ट्रॉली के कमर्शियल इस्तेमाल और अन्य प्रशासनिक नियमों पर नाराजगी।

2027 चुनाव तक विरोध की चेतावनी

हिरासत में लिए गए किसान नेताओं ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "जो नेता पहले जनता को सवाल पूछने के लिए उकसाते थे, आज वही सत्ता में आने के बाद किसानों की आवाज दबा रहे हैं।" किसान यूनियन ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो साल 2027 के विधानसभा चुनावों तक पंजाब के हर गांव में सरकार के मंत्रियों और विधायकों का इसी तरह डटकर विरोध किया जाएगा।