Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की अटकलों के बीच, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अबू धाबी ने साफ तौर पर कहा है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए अपने हवाई क्षेत्र, भूमि या समुद्री सीमाओं का इस्तेमाल नहीं होने देगा।
टाइम्स ऑफ इज़राइल की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में इस बात को दोहराया गया है कि देश क्षेत्रीय तटस्थता, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है।
अमेरिका के बयान के बाद यूएई का रुख क्यों सामने आया?
यूएई का स्पष्ट रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद आया है। कुछ दिन पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की एक बड़ी नौसेना मध्य पूर्व की ओर बढ़ रही है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस बयान से पूरे मध्य पूर्व में यह आशंका फैल गई कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इस संदर्भ में, यूएई ने यह स्पष्ट करना आवश्यक समझा कि वह किसी भी सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं होगा। यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा संकट को हल करने का सबसे प्रभावी तरीका संवाद, तनाव कम करने के प्रयास और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
यूएसएस अब्राहम लिंकन की मध्य पूर्व में तैनाती से चिंताएं बढ़ गईं हैं।
इस बीच, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व में तैनात कर दिया गया है। यह विमानवाहक पोत सोमवार को हिंद महासागर में पहुंचा, जिससे सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं बढ़ गईं। अक्टूबर के बाद यह पहली बार है कि किसी अमेरिकी विमानवाहक पोत को सीधे मध्य पूर्व में तैनात किया गया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह तैनाती अमेरिकी दबाव रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
ईरान-अमेरिका तनाव की कहानी
: पिछले महीने ईरान में बिगड़ती आर्थिक स्थिति के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि इन प्रदर्शनों के दौरान 3,000 से अधिक लोग मारे गए। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। इन घटनाओं के बाद से वाशिंगटन और तेहरान के बीच संबंध और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने ईरान पर मानवाधिकार उल्लंघन और क्षेत्रीय अस्थिरता का आरोप लगाया है, जबकि ईरान इन आरोपों को पश्चिमी दबाव की राजनीति बताकर खारिज करता है।
दोनों देशों का कड़ा रुख, तनावपूर्ण स्थिति।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान से निपटने के लिए सैन्य कार्रवाई सहित सभी विकल्प खुले हैं। वहीं दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो उसकी प्रतिक्रिया त्वरित और निर्णायक होगी।




