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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग ने आधुनिक युद्ध के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। आसमान से बरसती आग और एक-दूसरे के किलों को ढहाने की कोशिशों के बीच 'मिसाइल टेक्नोलॉजी' सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गई है। इजराइल का दावा है कि ईरान ने हमले में घातक बैलिस्टिक मिसाइलों और क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया है।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर ये मिसाइलें काम कैसे करती हैं? कोई रडार की नजर से बच निकलती है, तो कोई आवाज की रफ्तार से 5 गुना तेज चलती है। आइए, अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट में समझते हैं इन घातक हथियारों का पूरा विज्ञान।

1. बैलिस्टिक मिसाइल: अंतरिक्ष से गिरती मौत की बिजली

बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी के हमलों के लिए तैयार किया जाता है। इनका काम करने का तरीका किसी फेंके गए पत्थर की तरह होता है। प्रक्षेपण के बाद ये पृथ्वी के वायुमंडल को छोड़कर अंतरिक्ष की दहलीज तक जाती हैं और फिर गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के प्रभाव से सीधे अपने लक्ष्य पर गिरती हैं।

खासियत: लक्ष्य के करीब पहुंचते ही इनकी रफ्तार ध्वनि की गति से कई गुना अधिक हो जाती है।

मारक क्षमता: ये हजारों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को नेस्तनाबूद कर सकती हैं। ये पारंपरिक बमों के साथ-साथ परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हैं।

उदाहरण: भारत की अग्नि-V, अमेरिका की मिनुटमैन-III और रूस की इस्कंदर इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

2. क्रूज मिसाइल: रडार की नजरों से बचकर सटीक वार

क्रूज मिसाइलें बैलिस्टिक से बिल्कुल अलग होती हैं। ये किसी छोटे जेट विमान की तरह काम करती हैं और जेट इंजनों द्वारा संचालित होती हैं। ये पृथ्वी के वायुमंडल में जमीन से महज 50 से 100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ती हैं।

खासियत: इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण दुश्मन के रडार इन्हें आसानी से पकड़ नहीं पाते। इनमें GPS और अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम होता है, जिससे ये खिड़की के भीतर तक सटीक निशाना लगा सकती हैं।

दूरी: ये आमतौर पर 200 से 1,000 किलोमीटर तक वार करती हैं।

उदाहरण: भारत की ब्रह्मोस, अमेरिका की टोमाहॉक और रूस की कलिब्र दुनिया की सबसे घातक क्रूज मिसाइलें हैं।

3. हाइपरसोनिक मिसाइल: जिसे रोकना नामुमकिन सा है

हथियारों की रेस में हाइपरसोनिक मिसाइलें सबसे आधुनिक और खतरनाक मानी जाती हैं। इनकी सबसे बड़ी ताकत इनकी 'स्पीड' और 'लचीलापन' है। ये ध्वनि की गति से 5 गुना या उससे भी अधिक (Mach 5+) की रफ्तार से चलती हैं।

खासियत: ये मिसाइलें उड़ान के दौरान अपनी दिशा और गति बदल सकती हैं। इसी वजह से दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम फिलहाल इन्हें रोकने में पूरी तरह सक्षम नहीं है। इन्हें जमीन, समुद्र या लड़ाकू विमान, कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है।

4. एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल: आसमान में अभेद्य कवच

जहाँ बाकी मिसाइलें हमला करने के लिए हैं, वहीं एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM) का काम 'रक्षा' करना है। यह दुश्मन की आने वाली मिसाइल को हवा में ही ढूंढकर नष्ट कर देती है।

कार्यप्रणाली: सबसे पहले रडार सिस्टम दुश्मन की मिसाइल को डिटेक्ट करता है। इसके बाद कंप्यूटर गणना करता है और एक इंटरसेप्टर मिसाइल दागी जाती है, जो दुश्मन की मिसाइल से टकराकर उसे आसमान में ही खत्म कर देती है।

उदाहरण: इजराइल का आयरन डोम, अमेरिका की थाड (THAAD) और भारत की PAD और AAD प्रणालियाँ इसी सुरक्षा कवच का हिस्सा हैं।