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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : साल 2026 में चैत्र अमावस्या और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत की तारीखों को लेकर आम जनमानस में काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उदया तिथि और तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण लोग उलझन में हैं कि पितरों के लिए दान-तर्पण कब करें और मां दुर्गा के स्वागत के लिए कलश स्थापना कब होगी।

ज्योतिर्विद डॉ. दिवाकर त्रिपाठी और वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, आइए विस्तार से जानते हैं इन दोनों महत्वपूर्ण तिथियों का सही समय:

चैत्र अमावस्या 2026: कब करें पितृ तर्पण?

अमावस्या तिथि पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए समर्पित होती है।

तिथि का समय: अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026, बुधवार को सुबह 08:25 बजे (कुछ गणनाओं के अनुसार 07:39 बजे) शुरू हो जाएगी और अगले दिन 19 मार्च को सुबह 06:40 बजे समाप्त होगी।

दर्श अमावस्या (18 मार्च): चूंकि अमावस्या तिथि का अधिकतम समय 18 मार्च को मिल रहा है, इसलिए पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान के लिए 18 मार्च का दिन ही सर्वोत्तम है।

स्नान अमावस्या (19 मार्च): जो लोग उदया तिथि में गंगा स्नान करना चाहते हैं, वे 19 मार्च की सुबह जल्दी स्नान कर सकते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026: कब होगी कलश स्थापना?

हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि का आरंभ प्रतिपदा तिथि से होता है।

शुरुआत: 19 मार्च, गुरुवार को सुबह 06:40 बजे अमावस्या समाप्त होने के बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि लग जाएगी।

कलश स्थापना मुहूर्त: नवरात्रि का व्रत और कलश स्थापना 19 मार्च 2026 को ही किया जाएगा। मुहूर्त सुबह 06:41 बजे से शुरू होकर सूर्यास्त से पहले तक रहेगा।

विशेष: इसी दिन से हिंदू नव संवत्सर 2083 का भी आरंभ होगा।

चैती छठ 2026: सूर्य उपासना का महापर्व

चैत्र नवरात्रि के दौरान ही चैती छठ का पर्व भी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसका कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:

22 मार्च: नहाय-खाय (छठ पर्व का आरंभ)

23 मार्च: खरना पूजन

24 मार्च: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य)

25 मार्च: उदयगामी अर्घ्य और पारण (व्रत का समापन)

देवी का आगमन और गमन

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि में माता का आगमन डोली (पालकी) पर हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में भारी वर्षा या उथल-पुथल का संकेत माना जाता है। हालांकि, माता का प्रस्थान हाथी पर होगा, जो सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक है।