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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मरुधरा की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर में इन दिनों लोक पर्व गणगौर की रंगत अपने चरम पर है। चारों ओर गूंजते 'गोर-गोर गणपती, ईसर पूजे पार्वती' के सुरीले गीतों के साथ समूची सूर्य नगरी भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर नजर आ रही है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले इस महापर्व का समापन 21 मार्च को उद्यापन के साथ होगा। हाथों में रची मेहंदी, आंखों में काजल और सोलह श्रृंगार में सजी तीजणियाँ (कुंवारी कन्याएं और सौभाग्यवती महिलाएं) अपने सुहाग की लंबी उम्र और अच्छे वर की कामना के साथ ईसर-गौरी की आराधना में जुटी हुई हैं। जोधपुर के भीतरी शहर से लेकर नई बस्तियों तक गणगौर पूजन का यह अनोखा उत्साह देखते ही बन रहा है।

पारंपरिक गीतों और घुड़ले के साथ जीवंत हुई परंपरा

जोधपुर के मोहल्लों में सुबह सवेरे से ही सज-धजकर महिलाएं समूह में उद्यानों और जलाशयों से दूब (घास) लाने निकल रही हैं। मिट्टी के ईसर और गवर माता को प्रतिदिन जल पिलाने और विशेष पकवानों का भोग लगाने की रस्म पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। मारवाड़ की इस पारंपरिक संस्कृति में 'घुड़ला' घुमाने की परंपरा भी इस उत्सव को और खास बना रही है। शाम ढलते ही महिलाएं मंगल गीत गाती हुई गणगौर की सवारी निकाल रही हैं। भीतरी शहर के कुम्हारिया कुआं, सोजती गेट और खांडा फलसा जैसे क्षेत्रों में गणगौर के प्रति महिलाओं का समर्पण और उत्साह देखते ही बन रहा है, जहाँ सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपराएं आज भी उसी शिद्दत के साथ जीवित हैं।

21 मार्च को होगा भव्य उद्यापन, सजेगी विशेष झांकियां

इस बार गणगौर का उद्यापन 21 मार्च को बेहद खास होने जा रहा है। मारवाड़ की परंपरा के अनुसार, इस दिन महिलाएं व्रत का पारण करेंगी और ईसर-गौरी को अंतिम विदाई (विसर्जन) दी जाएगी। जोधपुर के प्रमुख बाजारों और मंदिरों में इस दिन विशेष झांकियां सजाई जाएंगी। कई परिवारों में सामूहिक उद्यापन के कार्यक्रम रखे गए हैं, जहाँ नवविवाहित जोड़े ईसर-गौरी का आशीर्वाद लेंगे। मान्यता है कि गणगौर पूजन से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। उद्यापन के दिन शहर के प्रमुख जलाशयों पर महिलाओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा और रोशनी के विशेष इंतजाम किए हैं।

पर्यटन का केंद्र बना जोधपुर का गणगौर उत्सव

जोधपुर का यह लोक पर्व न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों और आभूषणों से सजी महिलाओं के समूह को देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी जोधपुर पहुंच रहे हैं। होटलों और पर्यटन स्थलों पर गणगौर की थीम पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। लोक कलाकारों द्वारा दी जा रही प्रस्तुतियां माहौल को और भी खुशनुमा बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि जोधपुर की गणगौर अपनी भव्यता और सादगी के अनूठे मेल के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जो आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ी हुई है।