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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध वैशाली जिले को पर्यटन के राष्ट्रीय नक्शे पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन की पहल पर ‘मेरा गांव–मेरी धरोहर’ अभियान के तहत जिले भर में 671 ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की पहचान की गई है। इस अभियान का नेतृत्व जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में पंचायती राज विभाग कर रहा है, जिसे पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू किया गया है।

छिपी विरासतों को मिल रही नई पहचान

अभियान का उद्देश्य केवल प्रसिद्ध स्मारकों का संरक्षण नहीं, बल्कि उन विरासतों को सामने लाना भी है जो अब तक स्थानीय आस्था और सामाजिक महत्व के बावजूद गुमनामी में थीं। सर्वेक्षण के दौरान ऐसे कई स्थल सामने आए हैं, जिन्हें पहली बार सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जा रहा है। इससे वैशाली की ऐतिहासिक परतें एक बार फिर उजागर हो रही हैं।

पातेपुर में सर्वाधिक धरोहर स्थल

जिले के विभिन्न प्रखंडों में कराए गए सर्वे में पातेपुर प्रखंड सबसे आगे रहा, जहां 136 धरोहर स्थल चिह्नित किए गए। इन सभी स्थलों का चरणबद्ध तरीके से दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में इनके संरक्षण और विकास की ठोस योजना बनाई जा सके।

वैशाली स्तूप से लेकर स्थानीय आस्था केंद्र तक शामिल

अभियान की खास बात यह है कि इसमें विश्वविख्यात वैशाली स्तूप के साथ-साथ ऐसे स्थानीय स्थल भी शामिल किए गए हैं, जिनका सामाजिक और धार्मिक महत्व तो है, लेकिन वे अब तक व्यापक पहचान से वंचित थे। इनमें बाबा गणिनाथ मंदिर, पलवैया धाम, वैशाली प्रखंड के मझौली गांव स्थित ऐतिहासिक प्राचीन बरगद का वृक्ष और गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा जैसे स्थल प्रमुख हैं। ये सभी स्थल स्थानीय इतिहास और जनआस्था से गहराई से जुड़े हुए हैं।

प्रखंड और पंचायत स्तर पर तय की गई जिम्मेदारी

जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, अन्य प्रखंड स्तरीय अधिकारी, पंचायत सचिव और स्थानीय समितियों को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंचायती राज विभाग द्वारा निर्धारित समयबद्ध कार्ययोजना के अनुसार प्रशिक्षण, सर्वेक्षण, सत्यापन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की जा रही है।

पर्यटन और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

‘मेरा गांव–मेरी धरोहर’ अभियान से न केवल वैशाली की सांस्कृतिक पहचान सशक्त होगी, बल्कि भविष्य में पर्यटन, शोध और ग्रामीण विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे। जिला प्रशासन की यह पहल दूरदर्शी सोच, सक्रिय कार्यशैली और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।