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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : यमन में चल रहे लंबे संघर्ष ने एक बार फिर हिंसक मोड़ ले लिया है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने शुक्रवार (2 जनवरी, 2026) को यूएई समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद के ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस हमले में कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब संयुक्त अरब अमीरात ने हाल ही में यमन में अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त करने की घोषणा की है।

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, हवाई हमलों में हधरामौत प्रांत के सैयुन और अल-खशा क्षेत्रों में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। एक सैन्य अड्डे और हवाई अड्डे को भी निशाना बनाया गया, जिससे इलाके में हवाई यातायात ठप्प हो गया। कई घंटों तक कोई भी विमान उड़ान नहीं भर सका, जिससे नागरिकों में भय का माहौल बन गया। दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि मारे गए सभी लोग उनके सैनिक थे जो इन सैन्य ठिकानों पर तैनात थे। हाल के महीनों में यह पहली बार है कि एसटीसी के ठिकानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है।

यूएई की वापसी और बढ़ता तनाव:
हवाई हमलों से पहले, यूएई ने यमन से अपने अंतिम सैन्य बलों को वापस बुलाने की घोषणा की थी। अबू धाबी ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में तनाव कम करना चाहता है। हालांकि, मुकाला बंदरगाह पर हुए हमले को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया, जहां कथित तौर पर हथियारों की खेप को निशाना बनाया गया था। यूएई ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह केवल वाहनों की खेप थी।

एसटीसी के आरोप और सऊदी अरब की प्रतिक्रिया: 
दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद के नेताओं ने सऊदी समर्थित बलों पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बलों ने सैन्य ठिकानों पर शांतिपूर्वक नियंत्रण करने का वादा किया था, लेकिन फिर हवाई हमले शुरू कर दिए। एसटीसी के एक प्रवक्ता ने इस अभियान को अस्तित्व की लड़ाई बताया और कहा कि वे उग्रवाद से लड़ रहे हैं।

इस बीच, हद्रामौत प्रांत में सऊदी समर्थित प्रशासन का दावा है कि यह अभियान किसी राजनीतिक या सामाजिक समूह के खिलाफ निर्देशित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सैन्य ठिकानों पर कब्जा करना है। सऊदी सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर एसटीसी अपने लड़ाकों को वापस नहीं बुलाता है तो हमले जारी रह सकते हैं।

दशकों पुराना संघर्ष और क्षेत्रीय राजनीति: 
यमन में गृहयुद्ध लगभग एक दशक पुराना है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, हालांकि एक ही गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन उन्होंने संघर्ष में अलग-अलग स्थानीय समूहों का समर्थन किया है। ईरान समर्थित हाउथी विद्रोही उत्तरी यमन में अभी भी मजबूत हैं, जबकि दक्षिण और पूर्व में सत्ता संघर्ष जारी है।