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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : मार्च की विदाई के साथ ही सूरज के तेवर तल्ख हो गए हैं और उत्तर भारत समेत पूरे देश में पारा 40 डिग्री के पार पहुंचने लगा है। ऐसे में खुद को ठंडा रखने के लिए जंग छिड़ गई है—एसी (AC) बनाम कूलर (Cooler)। जहां एयर कंडीशनर मिनटों में कमरे को 'शिमला' बना देता है, वहीं कूलर की देसी ठंडक का अपना ही मजा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सेहत के लिए इन दोनों में से कौन सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित है? 31 मार्च 2026 की इस भीषण गर्मी में विशेषज्ञों ने कुछ ऐसी बातें साझा की हैं, जिन्हें जानकर आप अपनी पसंद बदल सकते हैं।

ताजी हवा का किंग: सेहत के लिहाज से कूलर क्यों है बेहतर?

विशेषज्ञों और डॉक्टरों की मानें तो स्वास्थ्य की दृष्टि से कूलर को एयर कंडीशनर की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है। इसके पीछे का सबसे बड़ा विज्ञान है 'क्रॉस वेंटिलेशन'। कूलर बाहर की ताजी हवा को खींचता है, उसे पानी के पैड्स के जरिए ठंडा करता है और फिर कमरे में फैलाता है। इससे कमरे में ऑक्सीजन का स्तर बना रहता है और हवा का निरंतर प्रवाह होता है। खासकर शुष्क और कम नमी वाले क्षेत्रों में कूलर की हवा न केवल सुकून देती है, बल्कि प्राकृतिक भी महसूस होती है।

एयर कंडीशनर (AC): आराम के साथ बीमारियां भी मुफ्त?

एसी की सबसे बड़ी खूबी इसकी जबरदस्त कूलिंग है, लेकिन यह सेहत के लिए कई चुनौतियां भी पेश करता है। एसी कमरे की उसी हवा को बार-बार ठंडा करके सर्कुलेट (Recirculate) करता है। कमरा पूरी तरह बंद होने के कारण ताजी हवा और ऑक्सीजन का प्रवेश रुक जाता है। लंबे समय तक एसी में बैठने से 'ड्राय स्किन' (त्वचा का रूखापन), गले में खराश, जोड़ों में दर्द और साइनस जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। साथ ही, अचानक एसी से निकलकर धूप में जाने से शरीर का तापमान बिगड़ता है, जिससे सर्दी-खांसी और बुखार का खतरा बढ़ जाता है।

एलर्जी और अस्थमा के मरीजों के लिए सावधानी

एसी का फिल्टर अगर समय पर साफ न हो, तो यह धूल के कणों और बैक्टीरिया का घर बन जाता है, जो अस्थमा या एलर्जी के मरीजों के लिए घातक हो सकता है। वहीं, कूलर का फायदा यह है कि यह हवा में नमी (Humidity) बनाए रखता है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है। हालांकि, कूलर के साथ सबसे बड़ी शर्त सफाई की है।

बचाव के तरीके: कैसे रहें सुरक्षित?

चाहे आप एसी चलाएं या कूलर, विशेषज्ञों ने कुछ सुनहरे नियम बताए हैं:

कूलर के लिए: कूलर का पानी हर 2-3 दिन में जरूर बदलें ताकि मच्छरों और फफूंद (Fungus) को पनपने से रोका जा सके।

एसी के लिए: एसी का तापमान कभी भी 24°C से 26°C से कम न रखें। बीच-बीच में कमरे की खिड़कियां थोड़ी देर के लिए जरूर खोलें ताकि ताजी हवा का आवागमन हो सके।

हाइड्रेशन: दोनों ही स्थितियों में शरीर में पानी की कमी न होने दें और भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ लें।