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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : महाराष्ट्र की राजनीति में 'दादा' के नाम से मशहूर उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अचानक निधन से राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। 28 जनवरी की सुबह बारामती जाते समय हुए विमान हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की विरासत को कौन संभालेगा? राजनीति का नियम है कि "काम चलता रहना चाहिए", इसलिए अजित पवार के बाद पार्टी नेता के पद के लिए तीन प्रमुख नामों पर चर्चा चल रही है।

1. सुनेत्रा पवार: क्या वह एक स्वाभाविक पत्नी बनने की दावेदार हैं? 

इस दौड़ में सबसे पहला नाम अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का है। अतीत में कम चर्चित रहीं सुनेत्रा पवार ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि वह चुनाव हार गईं, लेकिन अब वह राज्यसभा सांसद हैं और एक नेता के रूप में उनकी छवि उभर चुकी है। हालांकि, अजीत पवार की अनुपस्थिति में पार्टी के आंतरिक गुटबाजी को संभालना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

2. पार्थ पवार: क्या युवा नेतृत्व के लिए कोई उम्मीद है? 

दूसरा नाम अजीत पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार का है। पार्थ 2019 से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में हार के बाद से वे निष्क्रिय रहे हैं। उन्हें राजनीति का ज्यादा अनुभव नहीं है और पिछले पांच सालों में वे अपने पिता की तरह कोई मजबूत संगठन या कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी नहीं कर पाए हैं। हालांकि, एक युवा चेहरे के तौर पर उनका नाम चर्चा में बना हुआ है। वहीं, छोटे बेटे जय पवार फिलहाल राजनीति से दूर हैं।

3. प्रफुल पटेल: अनुभव और स्वीकार्यता 

अगर हम परिवार से बाहर देखें तो सबसे मजबूत दावेदार प्रफुल्ल पटेल हैं। वे शरद पवार के घनिष्ठ सहयोगी रहे हैं और केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। अजीत पवार के खिलाफ विद्रोह में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। चाहे केंद्र सरकार के साथ समन्वय करना हो या गठबंधन को कायम रखना हो, पटेल हर काम में माहिर हैं। पार्टी में भी उनकी लोकप्रियता काफी अधिक है।

अन्य नेता और शरद पवार का प्रभाव 

इसके अलावा, जयंत पाटिल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे जैसे नेता भी दौड़ में हो सकते हैं, लेकिन उनमें अजीत पवार जैसी 'जन अपील' की कमी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शरद पवार अब दोनों गुटों को एकजुट करेंगे। यह रास्ता बेहद मुश्किल है क्योंकि:

शरद पवार की पार्टी 'महा विकास अघाड़ी' (एमवीए) में है, जबकि अजीत का गुट सत्ताधारी 'महायुति' गठबंधन में है।

यदि पार्टी एकजुट हो जाती है, तो अजीत समूह के मंत्रियों को सत्ता छोड़नी पड़ेगी, जो कि संभव नहीं लगता।

शरद पवार के लिए इस समय भाजपा के साथ हाथ मिलाना भी असंभव है।

हालांकि, राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले शरद पवार कब फैसला लेंगे, यह कोई नहीं कह सकता। फिलहाल, एनसीपी के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा हुआ है।