Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि एक 'साधना' माना गया है। स्वाद के साथ-साथ भोजन ग्रहण करने के पारंपरिक तरीकों का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आजकल की भागदौड़ भरी और आधुनिक जीवनशैली में हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि हमारे शरीर का पाचन तंत्र सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम 'क्या' खा रहे हैं, बल्कि इस पर भी टिका है कि हम 'किस अवस्था' में खा रहे हैं।
गलत पोस्चर बन रहा है बदहजमी और ब्लोटिंग की वजह
इसी महत्वपूर्ण विषय पर प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर एक जानकारीपूर्ण वीडियो साझा किया है। डॉक्टर सोलंकी के अनुसार, अधिकांश लोग गलत आसन (पोस्चर) में बैठकर भोजन करने की आदत पाल चुके हैं। यदि आप बहुत ही पौष्टिक और हेल्दी डाइट ले रहे हैं, लेकिन फिर भी आपको लगातार बदहजमी, गैस और ब्लोटिंग (पेट फूलना) की समस्या रहती है, तो इसके पीछे आपका गलत तरीके से बैठना एक बड़ा कारण हो सकता है।
'भालू' की तरह सोफे पर बैठने से बढ़ती है ओवरईटिंग
डॉक्टर सोलंकी ने आगाह किया है कि बहुत से लोग सोफे या बिस्तर पर 'भालू' की तरह फैल कर या झुककर भोजन करते हैं। इस गलत मुद्रा के कारण हमारे मस्तिष्क तक 'पेट भरने का संकेत' (सटाइटी सिग्नल) काफी देरी से पहुंचता है। नतीजा यह होता है कि व्यक्ति अनजाने में ही अपनी भूख से अधिक यानी 'ओवरईटिंग' कर लेता है। यही कारण है कि आज के समय में मोटापा और एसिडिटी जैसी समस्याएं एक महामारी की तरह फैल रही हैं।
सुखासन और सीधी रीढ़: पाचन के लिए रामबाण
बेहतर स्वास्थ्य और सुचारू पाचन के लिए डॉक्टर सलाह देती हैं कि भोजन करते समय रीढ़ की हड्डी हमेशा सीधी रहनी चाहिए। उनके अनुसार, जमीन पर 'सुखासन' (पालथी मारकर) में बैठकर भोजन करना स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे उत्तम तरीका है। फर्श पर इत्मीनान से बैठकर भोजन करने से न केवल पाचन तंत्र सक्रिय रहता है, बल्कि शरीर को भोजन का अधिकतम पोषण भी प्राप्त होता है। अगर आप भी बेड या सोफे पर बैठकर खाने के शौकीन हैं, तो आज ही अपनी इस आदत को बदलें।
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